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भादो माह में कितनी बार मनाया जाता है तीज का पर्व, जानें महत्व?

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हिंदू धर्म में तीज का पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है. साल में तीज का पर्व तीन बार पड़ता है. साल की पहली तीज सावन के महीने में मनाई जाती है, जिसे हरियाली तीज के नाम से जाना जाता है. हरियाली तीज के 15 दिन के बाद अगली तीज आती है.सावन के महीने के बाद भाद्रपद माह पड़ता है. भाद्रपद माह में कजरी तीज और हरतालिका तीज का पड़ती है. कजरी तीज का पर्व रक्षाबंधन के तीन दिन के बाद मनाया जाता है. भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है. कजरी तीज को बड़ी तीज भी कहते हैंऔर इसे कजली तीज भी कहा जाता है. कुछ जगह इसे सातुड़ी तीज भी कहते हैं.

कजरी तीज 2025

1. भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को कजरी तीज का पर्व मनाते हैं. साल 2025 में भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि 11 अगस्त 2025, को सुबह 10.33 मिनट पर प्रारंभ होगी, जो 12 अगस्त 2025 को सुबह 8.40 मिनट पर समाप्त होगी. कजरी तीज का व्रत 12 अगस्त, मंगलवार के दिन रखा जाएगा.

2. इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य और जीवन में तरक्की के लिए व्रत करती हैं.

3. पौराणिक ग्रंथों के अनुसार माता पार्वती ने कजरी तीज का व्रत भगवान शिव के लिए किया था. उन्होंने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए यह व्रत किया था, और उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था.

हरतालिका तीज 2025

1. हरतालिका तीज का व्रत भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है. साल 2025 में तृतीया तिथि 25 अगस्त को सुबह 3.04 मिनट पर प्रारंभ होगी, जो 26 अगस्त, सुबह 04.24 मिनट पर समाप्त होगी. हरतालिका तीज का व्रत सोमवार, अगस्त 25, 2025 को रखा जाएगा.

2. इस दिन सुबह पूजा का मुहूर्त 06.17 मिनट से लेकर 08.57 मिनट तक रहेगा.

3. इस दिन प्रदोष काल में पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 7.39 मिनट से लेकर 9.47 मिनट तक रहेगा.

4. इस दिन महिलाएं भगवान शिव व माता पार्वती की रेत के द्वारा बनाई गई मूर्तियों की पूजा करती हैं और सुखी वैवाहिक जीवन तथा संतान की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करती हैं.

5. हरतालिका तीज का व्रत सुहागिन महिलाएं करती हैं. हरतालिका तीज की कथा के अनुसार, माता पार्वती की सहेलियां उनका अपहरण कर उन्हें घने जंगल में ले गई थीं, ताकि पार्वती जी की इच्छा के विरुद्ध उनके पिता उनका विवाह भगवान विष्णु से न कर दें.

 

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