
सामान्य बुखार की तुलना में डेंगू वायरस शरीर को किस प्रकार नुकसान करता है इसके पीछे के कारण को जानने के लिए दिल्ली एम्स के वैज्ञानिकों ने रिसर्च की है. आपको बता दें कि डेंगू में सिर्फ बदन दर्द या तेज बुखार ही नहीं होती बल्कि ये एक चालाक वायरस होता है जो शरीर की सुरक्षा के ढांचे को धीरे-धीरे कमजोर कर देता है. सवाल ये उठता है कि डेंगू का वायरस इतना चालाक कैसे हो गया और क्या शरीर उसे पहचान कर उसको रोक सकता है, क्या इस वायरस को खत्म किया जा सकता है?
क्या शरीर इस लड़ाई में हार जाता है:- AIIMS के डॉक्टर्स ने इसका इलाज एक रिसर्च के जरिए किया जिसमें आर्टिफिशियल तरीके से संक्रमित सेल्स में miR-133a मॉलिक्यूल की संख्या बढ़ा दी गई जिसके कारण डेंगू वायरस को बढ़ने में दिक्कत हुई. रिसर्च में ये भी पता चला कि जब miR-133a की संख्या बढ़ाई गई तब वायरस आसानी से खुद को रेप्लिकेट नहीं कर पाया
क्या डेंगू को रोक जा सकता है:- रिसर्च करने वाले वैज्ञानिकों ने बताया कि ये कोई चुटकियों में हल करना वाला मसला नहीं है. अभी इसमें समय लग सकता है. क्योंकि डेंगू को रोकने की अभी कोई विशेष दवा नहीं है इलाज सिर्फ लक्षण देख कर किया जाता है. लेकिन इस रिसर्च के परिणाम पर फोकस किया जाए तो वायरस को रोकने वाली दवा बनाई जा सकती है जिससे डेंगू के वायरस को जड़ से खत्म भी किया जा सकता है.



