
नई दिल्ली : चुनाव आयोग ने शनिवार को राजनीतिक दलों को कड़ा संदेश दिया। कहा कि कुछ राजनीतिक दलों और उनके बूथ स्तर के एजेंटों (बीएलए) ने समय पर मतदाता सूचियों की जांच नहीं की और मौका गंवा दिया।
अब वे पूर्व में तैयार की गई मतदाता सूचियों में त्रुटियों का मुद्दा उठा रहे हैं। अगर उन्होंने समय पर ऐसा कदम उठाया होता और यह गलतियां सही होतीं तो संबंधित एसडीएम, ईआरओ उसमें सुधार कर लेते।
चुनाव आयोग (ईसी) ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची तैयार करने के सभी चरणों में राजनीतिक दल शामिल हैं। ड्राफ्ट वोटर लिस्ट की हार्ड कॉपी और डिजिटल कॉपी सभी राजनीतिक दलों के साथ शेयर की जाती हैं और इन्हें चुनाव आयोग की वेबसाइट पर सभी के देखने के लिए उपलब्ध करा दिया जाता है।
बिहार में मतदाता सूची के सघन पुनरीक्षण अभियान (SIR) पर विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए चुनाव आयोग ने कहा कि बिहार के सभी राजनीतिक दलों को 20 जुलाई, 2025 से उन लोगों की लिस्ट दी गई थी जिनका नाम वोटर लिस्ट से बाहर किया जाना था। वोटर की मृत्यु, दूसरे जगहों पर स्थाई रूप से रहने, एक ही जानकारी को कई बार दर्ज करने की वजह से ऐसा किया गया।



