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भारत में पहली बार जानवरों को खून चढ़ाने और ब्लड बैंक के लिए बने नियम…

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हमारे आस-पास ऐसे कई बेजुबान जानवर रहते हैं जो अपना दुख-दर्द बता नहीं सकते हैं. उन्हें कोई चोट लग जाए तो वो खुद से अस्पताल नहीं जा सकते, अपनी तकलीफ को बता नहीं सकते. इसी के चलते सरकार ने पशु सुरक्षा को लेकर कदम उठाए हैं. सोमवार को सरकार ने देश में पहली बार पशु रक्त आधान  सेवाओं के लिए व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए.

पहली बार गाइडलाइन हुई जारी:- पशुओं में बल्ड चढ़ाना (blood transfusion) जीवन बचाने का एक बहुत जरूरी तरीका है. यह तब काम आता है जब किसी जानवर को गंभीर चोट लगी हो, खून की कमी (एनीमिया) हो, ऑपरेशन के दौरान खून ज्यादा निकल गया हो, कोई इंफेक्शन हो या खून जमने में समस्या हो. अब तक भारत में पशुओं के लिए बल्ड चढ़ाने की कोई तय राष्ट्रीय व्यवस्था नहीं थी. ज्यादातर बार यह सिर्फ इमरजेंसी हालात में किया जाता था, बिना किसी तय नियम जैसे कि डोनर की  नई गाइडलाइन इन सभी कमियों को पूरा करती हैं. इसमें बताया गया है कि किस तरह से डोनर जानवर का चुनाव, बल्ड लेना, उसको सही तरीके से रखना, चढ़ाना और इलाज के दौरान सुरक्षा का ध्यान रखना होगा. यह नियम भारतीय पशु चिकित्सा परिषद (Veterinary Council of India), पशु चिकित्सा विश्वविद्यालयों (Veterinary Universities), ICAR संस्थानों, राज्य सरकारों, पशु डॉक्टरों और विशेषज्ञों से सलाह लेकर बनाए गए हैं. इससे भारत की व्यवस्था अब दुनिया के अच्छे मानकों के बराबर हो जाएगी.

नई तकनीकों को दिया जाएगा बढ़ावा:- भविष्य में इन गाइडलाइंस के तहत नई तकनीकों को बढ़ावा दिया जाएगा, जैसे

  1. मोबाइल ब्लड कलेक्शन यूनिट्स (जहां सीधे जाकर खून लिया जा सके),
  2. दुर्लभ रक्त समूहों को सुरक्षित रखने की तकनीकें और मोबाइल ऐप्स, जिनसे डोनर और मरीज (जानवर) का सही मिलान आसानी से किया जा सके.

भारत में लगभग 537 मिलियन पशु (जैसे गाय, भैंस, बकरी) और करीब 125 मिलियन पालतू जानवर (जैसे कुत्ते, बिल्ली ) हैं. यह पूरा पशुपालन क्षेत्र देश के जीडीपी में 5.5% और कृषि जीडीपी में 30% से ज्यादा योगदान देता है. यह खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण रोजगार के लिए बहुत जरूरी है.

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