
26 अगस्त 2025:- फैटी किडनी डिजीज एक ऐसी स्थिति है जिसमें किडनी के टिशू में अतिरिक्त फैट जमा हो जाता है. यह अधिकतर उन लोगों में देखा जाता है जिनकी लाइफस्टाइल अस्वस्थ है, जैसे फिजिकल एक्टिविटी की कमी, जंक फूड और अत्यधिक मीठा या तैलीय भोजन का सेवन. मोटापा, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर भी फैटी किडनी के जोखिम को बढ़ाते हैं. किडनी का यह फैटी बदलाव धीरे-धीरे उसके कामकाज को प्रभावित करता है. शुरुआती दौर में इसे पहचान पाना मुश्किल होता है, क्योंकि इसके लक्षण अक्सर सामान्य थकान, बॉडी में सूजन या पेशाब में बदलाव जैसी छोटी समस्याओं के रूप में दिखते हैं. समय रहते इसका पता लगाकर इलाज करना जरूरी है.
फैटी किडनी डिजीज किन बीमारियों का कारण बनती है?
फैटी किडनी डिजीज न केवल किडनी को प्रभावित करती है, बल्कि यह कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का भी कारण बन सकती है. सबसे पहले, यह हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट डिजीज के जोखिम को बढ़ाती है क्योंकि किडनी और हार्ट का संबंध सीधा होता है. इसके अलावा, फैटी किडनी होने पर डायबिटीज और मेटाबोलिक सिंड्रोम की संभावना अधिक बढ़ जाती है.
शरीर में फैट का असंतुलन यूरिक एसिड, कोलेस्ट्रॉल और अन्य टॉक्सिन्स के स्तर को प्रभावित करता है, जिससे गठिया, फैटी लिवर और ब्लड शुगर इम्बैलेंस जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं. फैटी किडनी की वजह से किडनी की फ़िल्टरिंग क्षमता कमजोर हो जाती है, जिससे क्रॉनिक किडनी डिजीज या किडनी फेलियर तक का खतरा बन जाता है. ऐसे में लाइफस्टाइल और खानपान पर कंट्रोल रखकर इस समस्या को रोका जा सकता है.
कैसे करें बचाव
पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं ताकि किडनी साफ रहे.
जंक फूड, तैलीय और ज्यादा मीठा भोजन कम करें.
रोजाना एक्सरसाइज और वॉक को अपनेक दिनचर्या में शामिल करें.
वजन को कंट्रोल रखें और मोटापे से बचें.
समय-समय पर ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर की जांच करवाएं.



