
हिंदू धर्म में एकादशी तिथियों का विशेष महत्व माना जाता है. वर्षभर में कुल 26 एकादशियां आती हैं, जिनमें हर महीने दो एकादशियां होती हैं. इन्हीं में से एक है परिवर्तिनी एकादशी, जिसे भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की ग्यारहवीं तिथि पर रखा जाता है. मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में रहते हुए करवट बदलते हैं, इसलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है. कई स्थानों पर इसे पदमा एकादशी या जलझूलनी एकादशी भी कहा जाता है.
परिवर्तिनी एकादशी का महत्व:- एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित होती है. इस दिन श्रीहरि की पूजा-अर्चना करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होकर साधक की सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं. मान्यता है कि उनके आशीर्वाद से घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है. इस अवसर पर मंदिरों में लक्ष्मी-नारायण की विशेष पूजा की जाती है और दान-पुण्य का भी विशेष महत्व होता है.
परिवर्तिनी एकादशी पूजन विधि
1. प्रातः स्नान कर सूर्य देव को जल अर्पित करें.
2. पीले वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु व गणेश जी की विधिवत पूजा करें.
3. भगवान विष्णु को पीले फूल, पंचामृत और तुलसी पत्र अर्पित करें.
4. गणेश जी को दूर्वा और मोदक चढ़ाकर उनका आशीर्वाद लें.
5. पहले गणेश जी फिर भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें.
6. जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र, जल या छाता दान करें.
7. व्रत के दिन अन्न का सेवन न करके फलाहार या जलाहार ग्रहण करें.



