
नई दिल्ली : महागठबंधन के दलों के बीच सीटों के बंटवारे की गुत्थी सुलझने से पहले कांग्रेस ने अपनी दावेदारी वाली संभावित सीटों पर उम्मीदवारों के चयन की कसौटी तय करने की रूपरेखा निर्धारित करने की कसरत तेज कर दी है।
बिहार चुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवारों के चयन के लिए गठित स्क्रीनिंग कमिटी की शुक्रवार को हुई पहली औपचारिक बैठक में संभावित सीटों से लेकर प्रत्याशी तय करने के आधारों पर गहन चर्चा की गई। हालांकि पार्टी ने अपनी दावेदारी वाले संभावित सीटों की संख्या तथा उनके नाम का खुलासा अभी नहीं किया है। कांग्रेस समेत महागठबंधन की पार्टियां बेशक दावा करें कि सीट बंटवारे का मसला अगले कुछ दिनों में त्वरित गति से हल हो जाएगा मगर दावे-प्रतिदावे को देखते हुए यह इतना सहज नजर नहीं आ रहा।
जाहिर तौर पर कांग्रेस पिछली बार की 70 सीटों में दी गई अधिकांश ऐसी सीटों को अपने खाते में नहीं रखना चाहेगी जहां उसके लिए चुनावी संभावनाएं नगण्य हों। बिहार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता किशोर कुमार झा ने कहा कि बेशक पार्टी को अपनी पसंद की सीट से समझौता नहीं करना चाहिए क्योंकि जान बूझकर ऐसी सीटें खाते में डाल दी जाती है जहां राजद भी पिछले 20 साल में जीत हासिल नहीं कर पाया है।
दिल्ली में स्क्रीनिंग कमिटी की बैठक में शरीक हुए बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश राम ने भी कहा कि उम्मीदवारों के चयन के मानकों के साथ-साथ पार्टी की अपनी संभावित सीटों के विषय में चर्चा हुई।
कब कटौती कर सकती है कांग्रेस?साफ है कि कांग्रेस अपने आकलन तथा जमीनी ताकत के आधार पर चयनित सीटों का भरोसा मिलने पर ही संख्या में कटौती को लेकर तैयार होगी। राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा के बाद बिहार में कांग्रेस का सियासी ग्राफ ऊपर गया है जिसको लेकर पार्टी के नेता-कार्यकर्ता न केवल उत्साहित हैं बल्कि राजद पर सीटों के लिए दबाव भी बना रहे।
इसके मद्देनजर भाकपा माले के शीर्षस्थ नेता दीपांकर भटटाचार्य ने कांग्रेस को राजनीतिक हकीकत का समझते हुए 70 सीटों के दावे की जिद नहीं करने की नसीहत दी। कांग्रेस कार्यसमिति की पटना में विस्तारित बैठक भी पार्टी की चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा है। दशकों बाद कार्यसमिति की बैठक पटना में हो रही है जहां कांग्रेस का पूरा शीर्षस्थ नेतृत्व मौजूद रहेगा। जाहिर तौर पर बिहार कांग्रेस इस बड़े आयोजन के जरिए सीटों की अपनी दावदारी को और मजबूत करने का प्रयास करेगी।



