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बेंगलुरु में ट्रैफिक समस्या को खत्म करने की तैयारी, शहर के बाहर बनेगा टेक हब…

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कर्नाटक सरकार बेंगलुरु की ट्रैफिक समस्या को कम करने के लिए शहर के बाहर नए टेक्नोलॉजी हब विकसित करने की योजना बना रही है. डिप्टी सीएम डी.के. शिवकुमार ने रविवार को बताया कि इससे शहर का बोझ घटेगा और कामकाजी लोगों का आने-जाने का समय भी बचेगा. शिवकुमार ने कहा कि बेंगलुरु में दुनिया के सबसे बड़े टेक प्रोफेशनल्स की आबादी में से एक रहती है. करीब 25 लाख लोग. इनमें से लगभग 10 लाख से ज्यादा सिर्फ आउटर रिंग रोड (ORR) के आस-पास काम करते हैं. उन्होंने कहा, हम लोगों का सफर का समय घटाना चाहते हैं, और इसके लिए हमारे पास ठोस रणनीति है.

शनिवार रात उनकी मुलाकात उद्योग जगत की जानी-मानी हस्तियों बायोकॉन की किरण मजूमदार-शॉ और वेंचर कैपिटलिस्ट मोहंदास पई से हुई. शिवकुमार ने कहा, मैंने उनसे कहा कि हम सब मिलकर बेंगलुरु के लिए काम करेंगे, और वे इस पर सहमत हैं. यह बैठक उस सोशल मीडिया बहस के बाद हुई जिसमें बिजनेस लीडर्स और राज्य के मंत्रियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप चले थे. दीपावली के मौके पर दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं और अब मिलकर काम करने का निर्णय लिया.

ORR के लिए बड़ा प्लान:- शिवकुमार ने बताया कि उनके पास आउटर रिंग रोड के लिए बड़े प्लान है. उन्होंने आईटी/बीटी मंत्री प्रियंक खड़गे को निर्देश दिया है कि 18-20 नवंबर को होने वाले बेंगलुरु टेक समिट से पहले ORR पर मौजूद बड़ी कंपनियों के सीईओ से मुलाकात करें. बता दें कि सिल्क बोर्ड से हेब्बाल तक फैले ORR एरिया में माइक्रोसॉफ्ट, सिस्को, इंटेल, एक्सेंचर, विप्रो जैसी 500 से ज्यादा आईटी कंपनियां और एम्बेसी टेक विलेज, आरएमजेड ईकोवर्ल्ड, और मन्यता टेक पार्क जैसे बड़े बिजनेस पार्क हैं. यही वजह है कि यह इलाका शहर का सबसे जामग्रस्त हिस्सा बन चुका है.

विप्रो के संस्थापक अज़ीम प्रेमजी ने हाल ही में सुझाव दिया था कि सीएम सिद्धारमैया ORR की ट्रैफिक समस्या पर एक एक्सपर्ट स्टडी करवाएं. उन्होंने कहा कि कंपनी कानूनी कारणों से अपने कैंपस को ट्रैफिक के लिए नहीं खोल सकती, लेकिन सरकार चाहे तो इस अध्ययन के लिए वे फंड देने को तैयार हैं.

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