मुजफ्फरपुर: कहते हैं सियासत में कोई स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता। नफा-नुकसान को देखकर रिश्ते बनते-बिगड़ते हैं। चुनावी दहलीज पर मुजफ्फरपुर के नेता सियासी हवा का रुख भांपकर खूब दल बदल रहे हैं। किसी की घर वापसी अपनी पुरानी ही पार्टी में हो रही है, तो कोई दूसरे दल में जा रहा है।
आम जनता चुपचाप इस आया राम, गया राम वाला खेल देख रही है। जिले में विभिन्न राजनीतिक दलों के अब तक करीब एक दर्जन नेता अपना पाला बदल चुके हैं। इसमें दिग्गज नेता अजय निषाद, गणेश भारती, अनिल सहनी, अजीत कुमार, बेबी कुमारी, कोमल सिंह, अजय कुशवाहा, रामकुमार सिंह और विनायक गौतम शामिल हैं।
विधानसभा चुनाव से ठीक पहले इस कदम को जानकर तोड़-जोड़ का खेल बता रहे हैं। ताकि पार्टी को विशेष जाति और समुदाय में समर्थन प्राप्त हो सके और वोट बैंक बढ़े। शाम में एक दल की दुहाई और निष्ठा जताकर कसमें खाने वाले सुबह होते दूसरे दल की सदस्यता ग्रहण कर रहे हैं।
दोपहर को चुनावी सभा में जिस पार्टी के पक्ष में जन समर्थन मांगते हैं, तो रात होते ही इसकी खामियां गिनाकर इस्तीफा सौंप देते हैं। चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद से लगातार यह आने-जाने का क्रम लगा है।
भाजपा ने उनकी पत्नी को औराई से अपना उम्मीदवार बना दिया। भाजपा नेता अजीत कुमार चुनाव से ठीक पहले जदयू में आ गए। उन्हें पार्टी ने कांटी विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतारा है।
अनिल सहनी पहले राजद में थे। कुछ दिन पहले उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया और भाजपा का दामन थाम लिया। कोमल सिंह ने पिछला विधानसभा चुनाव गायघाट सीट पर लोजपा से लड़ा था। अब इस चुनाव से ठीक पहले उन्हें जदयू ने उसी सीट से मैदान में उतारा है।
इसी तरह बेबी कुमारी पहले भाजपा में थीं, अब वे लोजपा में हैं। पार्टी ने उन्हें बोचहां सीट से प्रत्याशी बनाया है। इसी तरह अजय कुमार कुशवाहा पहले भाजपा में थे। उन्होंने इस्तीफा देकर जदयू की सदस्यता ग्रहण कर ली। अब पार्टी ने उन्हें मीनापुर से टिकट दिया है।
इस सूची और कई नेता हैं। साथ ही चुनाव से पहले और भी कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं। दरभंगा में शनिवार को ही वीआइपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बद्री कुमार पूर्वे, राजद के अतिपिछड़ा प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. कुमार गौरव, राजीव कुशवाहा समेत कई नेता भाजपा में शामिल हो गए।



