
हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने वाला बहुत ही शुभ व्रत माना गया है. प्रदोष का अर्थ है संध्या काल का समय, जब दिन और रात के मिलन की बेला होती है. ऐसी मान्यता है कि इसी समय भगवान शिव और माता पार्वती कैलाश पर्वत पर नृत्य करते हैं. जो भक्त इस समय पूरी श्रद्धा से व्रत और पूजन करते हैं, उन्हें सुख, समृद्धि, धन, और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है. विशेषकर सोम प्रदोष व्रत का पालन करने से चंद्र दोष समाप्त होते हैं, मानसिक शांति मिलती है और पारिवारिक जीवन में सामंजस्य बना रहता है. कहा गया है कि इस व्रत के प्रभाव से भगवान शिव की कृपा से समस्त पापों का नाश होता है.
सोम प्रदोष व्रत की सरल पूजा विधि:- प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की पूजा प्रदोष काल में ही करना सबसे शुभ माना जाता है. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. व्रत का संकल्प लें. दिन भर उपवास रखें . शाम को पूजा से पहले फिर स्नान करें. फिर किसी शांत और पवित्र स्थान पर भगवान शिव की मूर्ति या शिवलिंग स्थापित करें. शिवलिंग पर जल, गाय का दूध, दही, घी, शहद, और गंगाजल से अभिषेक करें. महादेव को बेलपत्र (11 या 21), धतूरा, भांग, शमी के पत्ते, सफेद चंदन, अक्षत (चावल), और फूल अर्पित करें.
माता पार्वती को सोलह श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें. घी का दीपक जलाएं और ‘ॐ नमः शिवाय’ या महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जाप करें. प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें या सुनें. आखिर में भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें.पूजा के बाद प्रसाद वितरित करें और अगले दिन, यानी 18 नवंबर को सूर्योदय के बाद व्रत का पारण करें.
सोम प्रदोष व्रत का महत्व:- सोम प्रदोष व्रत करने से भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है. इस व्रत को करने वाले भक्तों के सभी कष्ट और पाप दूर होते हैं. सोमवार का दिन भगवान शिव का प्रिय दिन होता है. इसलिए सोम प्रदोष व्रत करने से चंद्रमा से संबंधित दोष (जैसे मानसिक तनाव) दूर होते हैं और उत्तम स्वास्थ्य तथा लंबी आयु का वरदान मिलता है. ऐसी मान्यता है कि सोम प्रदोष व्रत विशेष रूप से संतान प्राप्ति की कामना रखने वाले दंपत्तियों के लिए बहुत फलदायी होता है. सच्चे मन से व्रत और पूजा करने से भगवान शिव भक्त की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है.



