16 नवम्बर 2025:- हर महीने की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है, जो कि भगवान शिव को समर्पित होता है. देवों के देव महादेव को प्रसन्न करने के लिए सोम प्रदोष व्रत विशेष रूप से फलदायी कहा गया है. धर्म शास्त्रों में प्रदोष व्रत की महिमा का वर्णन किया गया है. मार्गशीर्ष मास का पहला प्रदोष व्रत 17 नवंबर को है और यह सोमवार को पड़ रहा है, इसलिए इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाएगा. अगर आप भी यह व्रत करने जा रहे हैं, तो आपको बताते हैं इसका महत्व और पूजा का मुहूर्त.
सोम प्रदोष व्रत 2025:- 17 नवंबर को प्रदोष पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 27 मिनट से लेकर शाम 8 बजकर 7 मिनट तक है. यह प्रदोष काल है, जो सूर्यास्त के बाद का समय होता है. प्रदोष काल के दौरान भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करना विशेष शुभ माना गया है.
1. त्रयोदशी तिथि शुरू – 17 नवंबर सुबह 4:46 मिनट पर.
2. त्रयोदशी तिथि समाप्त – 18 नवंबर सुबह 7:11 मिनट पर.
3. प्रदोष काल पूजा टाइम – 17 नवंबर शाम 5:27 से रात 8:07 मिनट तक.
प्रदोष व्रत में शिवलिंग पर क्या चढ़ाना चाहिए:- प्रदोष व्रत के दौरान शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, शहद, और गन्ने के रस से अभिषेक करना चाहिए. साथ ही, ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करते हुए बिल्व पत्र, धतूरा, और अन्य शिव को प्रिय चीजें चढ़ाएं और फिर धूप-दीप जलाकर शिव चालीसा और आरती करें.
प्रदोष काल में पूजा:- प्रदोष काल में पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. प्रदोष व्रत के दिन मंदिर में की गई प्रदोष पूजा का फल 100 गुना अधिक मिलता है. प्रदोष व्रत में फलाहार ग्रहण करना चाहिए और अन्न नहीं खाना चाहिए
सोम प्रदोष व्रत का महत्व:-धार्मिक मान्यता के अनुसार, सोम प्रदोष व्रत मानसिक शांति, वैवाहिक सुख और पारिवारिक समृद्धि प्रदान करता है. ऐसा माना जाता है कि सोम प्रदोष व्रत रखने से संतान सुख की प्राप्ति होती है, दांपत्य जीवन खुशहाल रहता है और चंद्र दोष से मुक्ति के लिए भी यह व्रत लाभकारी माना जाता है.



