
महासमुंद :धान उत्पादन में अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाला छत्तीसगढ़, जिसे देशभर में ‘धान का कटोरा’ कहा जाता है, इस समय एक गंभीर कृषि संकट से गुजर रहा है। राज्य में हर वर्ष नियत समय पर शुरू होने वाली धान खरीदी प्रक्रिया इस बार अब तक प्रारंभ नहीं हो सकी है। इसके चलते प्रदेश के लाखों किसान बेचैनी और असमंजस की स्थिति में हैं। राज्य के अधिकांश जिलों में धान कटाई पूरी हो चुकी है, लेकिन खरीद केंद्रों में ताले लटके होने के कारण किसानों को अपना धान घरों, खलिहानों और अस्थायी पॉलिथीन टेंटों में सुरक्षित रखना पड़ रहा है। इस बीच बदलते मौसम और अनियमित वर्षा की आशंका किसानों के लिए एक और बड़ी चिंता बन गई है। भीगने या खराब होने की स्थिति में फसल का भारी नुकसान होना तय है।
जिपं सदस्य मोक्ष कुमार प्रधान ने सरकार ने धान खरीदी में हो रही देरी के मामले में सरकार हमाल बोला है। कांग्रेस नेता एवं जिला पंचायत सदस्य मोक्ष कुमार प्रधान ने राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने जारी विज्ञप्ति में कहा की किसान त्रस्त हैं और सरकार मस्त। समय पर धान खरीदी नहीं खोलकर सरकार किसानों के साथ नाइंसाफी कर रही है। छत्तीसगढ़ धान का कटोरा कहलाता है, लेकिन आज यहां के किसान अपनी फसल बेचने के इंतजार में परेशान हैं। प्रधान ने यह भी आरोप लगाया कि देरी के कारण किसानों की आर्थिक स्थिति डगमगाने लगी है, क्योंकि उन्हें आगे की रबी फसल की तैयारी के लिए तुरंत नकदी की जरूरत होती है। गांवों में कई किसानों ने धान बेचकर कर्ज चुकाने, बीज-खाद खरीदने, और घर-परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने की योजनाएँ बना रखी थीं, लेकिन खरीदी न खुलने के कारण वे ठिठके पड़े हैं।
श्री प्रधान ने बताया कि धान किसानों की रीढ़ है और यही उनकी आजीविका का प्रमुख साधन है। ऐसे में खरीदी में देरी से किसान मानसिक और आर्थिक दोनों रूप से परेशान हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार को समय पर व्यवस्था करनी चाहिए थी।सरकार से तत्काल धान खरीदी शुरू करने की मांग कांग्रेस नेता ने राज्य सरकार से मांग की है कि—तुरंत धान खरीदी प्रारंभ हो, किसानों के लिए पर्याप्त बारदाने और स्टाफ की व्यवस्था की जाए,तथा खरीदी प्रक्रिया को सुचारू और पारदर्शी बनाने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएँ।



