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4 या 5 दिसंबर, कब है अन्नपूर्णा जयंती? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि…

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अगहन (मार्गशीर्ष) माह को हिंदू धर्म में बहुत ही शुभ और पवित्र माना जाता है. इस महीने की पूर्णिमा तिथि को माता अन्नपूर्णा की जयंती मनाई जाती है. अन्नपूर्णा देवी को अन्न, समृद्धि, पोषण और जीवन-निर्वाह की देवी कहा गया है. मान्यता है कि माता की कृपा बनी रहे तो घर-परिवार में कभी अन्न का अभाव नहीं होता. यही कारण है कि अन्नपूर्णा जयंती हिंदू पंचांग में एक महत्वपूर्ण तिथि मानी जाती है. इस साल अन्नपूर्णा जयंती को लेकर लोगों में थोड़ा भ्रम है कि इसे 4 दिसंबर को मनाया जाए या 5 दिसंबर को.

अन्नपूर्णा जयंती 2025 तिथि व मुहूर्त

1. पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 4 दिसंबर 2025, सुबह 8 बजकर 37 मिनट तक रहेगा.

2. पूर्णिमा तिथि का समापन: 5 दिसंबर 2025, सुबह 4 बजकर 43 मिनट पर होगा

पूजा का शुभ मुहूर्त:- अन्नपूर्णा जयंती के दिन सुबह 10 बजकर 53 मिनट से दोपहर 1 बजकर 29 मिनट तक रहेगा. यह समय अन्नपूर्णा देवी की पूजा, अन्न दान और व्रत के लिए अत्यंत उत्तम माना गया है.

कौन हैं माता अन्नपूर्णा:- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता अन्नपूर्णा भगवान शिव की अन्न-रूप शक्ति हैं. कथा के अनुसार, एक बार भगवान शिव ने कहा कि संसार में सब कुछ मिथ्या है. तब माता पार्वती ने उनकी परीक्षा लेने के लिए अन्न देना बंद कर दिया. जब संसार में अकाल और भूख फैलने लगी, तब स्वयं भगवान शिव ने विनम्रता पूर्वक माता अन्नपूर्णा से अन्न प्रदान करने की प्रार्थना की. उस दिन से अन्न को पूर्ण, पवित्र और दिव्य माना जाने लगा. इस कथा का संदेश है कि संसार में अन्न सर्वोच्च है और इसके बिना जीवन संभव नहीं

अन्नपूर्णा जयंती पूजा विधि:-  जयंती के दिन सुबह जल्दी उठकर घर की अच्छी तरह साफ-सफाई करें. रसोई के चूल्हे और अन्य बर्तनों को गंगाजल से शुद्ध करें. रसोई के उस स्थान पर जहाँ खाना बनता है (जैसे चूल्हा), वहाँ माता अन्नपूर्णा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें.पूजा स्थान पर एक कलश में जल भरकर रखें. माता अन्नपूर्णा को रोली, अक्षत, हल्दी, फूल, फल, और नैवेद्य (भोग) अर्पित करें. भोग में खीर या घर में बनी कोई भी सात्विक मिठाई जरूर शामिल करें.

अन्नपूर्णा जयंती का महत्व:-  हिंदू धर्म में, देवी अन्नपूर्णा को अन्न, समृद्धि एवं जीवन निर्वाह की अधिष्ठात्री देवी माना गया है. वह भगवान शिव की पत्नी माता पार्वती का ही एक रूप हैं. ऐसी मान्यता है कि सृष्टि के पालन के लिए ‘अन्न’ ही जीवन का आधार है, और माता अन्नपूर्णा ही इसकी संरक्षिका हैं.अगहन (मार्गशीर्ष) माह में माता अन्नपूर्णा की पूजा का विशेष महत्व है, क्योंकि इस महीने में किए गए अनुष्ठान विशेष फलदायी होते हैं. अन्नपूर्णा जयंती के दिन विधि-विधान से पूजा करने पर व्यक्ति के घर में कभी भी अन्न के भंडार खाली नहीं होते और दरिद्रता दूर होती है.

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