
भगवान सूर्य 12 राशियों में से जिस किसी राशि में प्रवेश करते हैं, उसके नाम पर संक्रांति का पर्व मानाया जाता है. पौष माह में भगवान सूर्य धनु राशि में प्रवेश करते हैं, तो धनु संक्रांति का पर्व मनाया जाता है. धनु संक्रांति अत्यंत पावन दिन होता है. धनु संक्रांति के दिन से एक मास का खरमास लग जाता है. फिर भगवान सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर खरमास की अवधि समाप्त होती है.
धनु संक्रांति के दिन पवित्र नदी में स्नान और दान किया जाता है. इस दिन स्नान और दान करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. इस दिन भगवान सूर्य का विधि-विधान से पूजन किया जाता है. उनको अर्घ्य दिया जाता है. इस दिन पूजन करने से भगवान सूर्य आरोग्यता का आशीर्वाद प्रदान करते हैं. हालांकि, इस साल लोगों के मन में धनु संक्रांति की डेट को लेकर संशय है. ऐसे में आइए जानते हैं कि इस साल धनु संक्रांति का पर्व कब मनाया जाएगा? साथ ही जानते हैं इसका पुण्य काल और पूजा विधि.
धनु संक्रांति कब है:- भगवान सूर्य 16 दिसंबर 2025, मंगलवार के दिन सुबह 04 बजकर 26 मिनट पर वृश्चिक राशि से निकलकर धनु में प्रवेश करने वाले हैं. इसी के साथ खरमास की शुरुआत हो जाएगी. ऐसे में इस साल 16 दिसंबर को धनु संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा. सूर्य देव धनु राशि में 14 जनवरी तक विराजमान रहेंगे. इसके बाद वो मकर राशि में प्रवेश करेंगे. तब मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा.
धनु संक्रांति शुभ मूहूर्त:- धनु संक्रांति के दिन पुण्य काल सुबह 07 बजकर 09 मिनट से दोपहर 12 बजकर 23 मिनट तक रहेगा. इस दिन महा पुण्य काल सुबह 07 बजकर 09 मिनट से सुबह 08 बजकर 53 मिनट तक रहेगा. इस दिन पुण्य क्षण 04 बजकर 27 मिनट पर रहेगा.
धनु संक्रांति पूजा विधि
- धनु संक्रांति के दिन सुर्योदय से पहले उठें.
- फिर पवित्र नदी में स्नान करें, या घर पर पानी में गंगाजल मिलकर स्नान करें.
- इसके बाद साफ कपड़े पहनें और सूर्य देव के दर्शन करें.
- फिर तांबे के लोटे में जल लें.
- जल में रोली और फूल डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें.
- अर्घ्य देते समय ॐ सूर्याय नमः मंत्र का जप करें.
- भगवान सूर्य को लाल फूल अर्पित करें.



