रिपोर्टर मुन्ना पांडेय सरगुजा : एक अजनबी के हाथ में देकर हमारा हाथ।
लो साथ छोड़ने लगा आखिर ये साल भी।। जो गया वह बेहतर था, और जो आ रहा है वह और भी बेहतरीन होगा। इसी तर्ज पर कुछ भूली बिसरी खटी मीठी यादों के साथ लोगों ने पुराने साल 2025 को अलविदा कहा। 31 दिसम्बर 2025 की आखरी रात सारा आलम नये साल 2026 के आगमन और उसके स्वागत करने के खुमार में डुबा रहा। नये साल की जश्न मनाने युवाओं में खासा उत्साह देखा गया।नये वर्ष 2026 के आगमन को लेकर हर दिल में एक मस्ती सी छाई रही।
नये साल की स्वागत में युवाओं ने सारी रात आतिशबाजी करते हुए ढोल नगाड़े तथा डीजे साउण्ड सिस्टम के स्वर लहरी पर थिरकते रहे।साल का आखिरी रात भी आने वाले नये साल के स्वागत में जागती रही। फलक के सितारे भी खुशियों भरी सुबह सूरज के नई किरण के इंतजार में नजरें बिछाये रहे।नया साल के लम्हों को यादगार बनाने लोगों ने मैनपाट ,सारासोर ,केंदई फाल, बुका बांध, कुंवरपुर जलाश्य तथा अन्य दूसरे पर्यटन स्थल पर पहुंच नये साल को यादगार बनाया। आपस में एक दूसरे को मिठाइयां खिलाकर खुशियां बांटें तथा नववर्ष की मुबारक बाद दिया। ग्रिटिंग कार्ड एवं मोबाइल फोन के जरिए से बधाई संदेश भेजकर नववर्ष की शुभकामनाएं प्रेषित किये।
बधाई संदेश भेजने का सिलसिला जारी है और आने वाले कुछ दिनों तक जारी रहेगा। क्षेत्र के गांव कस्बों गली मुहल्लों में अंग्रेजी नया साल के आने की खुशी में जश्न मनाये जाने का दौर जारी है। कुछ हिन्दी नववर्ष के अनुयायीयों ने अंग्रेजी नये साल मनाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। क्योंकि हिंदी चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष से नया साल मनाये जाने की प्राचीन परिपाटी रही है। दरअसल हिन्दू धर्म के अनुसार विक्रम संवत बदलने के साथ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा रामनवमीं से नूतन वर्ष का शुभारंभ होता है तब नव वर्ष मनाया जाता है। लिहाजा हिंदी नव वर्ष मनाने वालों के नजर में ईस्वी सन नये साल की कोई एहमियत नहीं है।
फिलहाल क्षेत्र में जश्ने साल 2026 खुशगवार माहौल में मनाया गया चारों तरफ अंग्रेजी नये साल का उत्सव मनाये जाने की धूम रही । असमाजिक तत्वों , हुड़दंगियों पर पुलिस की कड़ी पहरेदारी रहीं। शांति व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी को वर्दीदारों ने बखूबी निभाया। नये साल पर पीने पिलाने की रस्म अदा की गई। समाचार लिखे जाने तक किसी अप्रिय घटना होने की खबर नहीं रही।



