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अवैध कोयला तस्करी करने का झूठा इल्जाम लगा कर पत्रकार को फंसाने की साज़िश, पत्रकार ने अपने बचाव में पुलिस महानिदेशक व आईजी को सौंपा ज्ञापन

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मुन्ना पांडेय रिपोर्टर सरगुजा : कहते हैं लोहा लोहे को काटता है इसी कहावत को चरितार्थ करती एक मामला प्रकाश में आया है।वरिष्ठ पत्रकार अखिलेश जायसवाल निवासी महंगाई थाना रामानुजनगर ने पुलिस महानिदेशक व पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज दीपक कुमार झा को 4 जनवरी 2026 रविवार को ज्ञापन सौंप तथाकथित नामजद दो पत्रकारों और विश्रामपुर पुलिस के खिलाफ दरखास्त पेश कर न्यायोचित कार्यवाही करने की मांग किया है।अखिलेश जायसवाल का कहना है कुछ स्थानीय पत्रकार दुर्भावनावश उनके उपर कोयला तस्करी करने का झूठा इल्जाम लगाते हुए साजिश रचने कोशिश कर रहे हैं ‌।उन्होंने अपने तहरीर में बताया कि वह दैनिक अखबार की प्रतिनिधि के अलावा भारतीय पत्रकार समिति छत्तीसगढ़ के प्रदेश महासचिव भी हैं। अखिलेश जायसवाल ने ज्ञापन में जाहिर किया है कि स्थानीय कुछ पत्रकार उनके साथ प्रतिस्पर्धा के कारण इर्ष्या रखते थाना बिश्रामपुर पुलिस से सांठगांठ कर उन्हें कोयला तस्करी करने के झूठे इल्ज़ाम पर चक्रव्यूह की रचना करते फंसाने की कोशिश कर रहे हैं।


दरअसल मामले का मजमून है कि 30 दिसंबर 2025 को सुबह बिलासपुर की ओर से आ रहे कोयला लोड ट्रक नंबर सीजी 15 एसी 4616 को पुलिस ने रोका था ।
सूचना मिलने पर वे कवरेज के लिए ग्राम लैंगा के पास पहुंचे और कुछ पत्रकार मौके पर पहले से ही मौजूद थे। राजापुर चौक पर ट्रक के ड्राइवर व खलासी को उतारकर शख्सों द्वारा हाथ- मुक्के और डंडों से पीटा जा रहा था। ट्रक चालक ने दूर से उन्हें देखकर गुहार लगाई कि वे संदीप के ट्रक का चालक हैं और उन्हें बिना वजह पिछले 1 घंटे से मारपीट करते रोके रखा गया है।

अखिलेश जायसवाल ने जिक्र किया है कि ट्रक चालक उन्हें पहले से पहचानता था। पत्रकार जायसवाल ने जब मोबाइल से वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू की तो पुलिस कर्मियों ने रोका और कहा कि थाने जाकर पूछताछ करेगे । पुलिस ट्रक को चालक सहित हेल्पर को थाना बिश्रामपुर ले गई। मारपीट करने वाले पत्रकार भी पीछे पीछे पहुंचे। थोड़ी देर बाद तथाकथित पत्रकारों ने थाने में घुसकर फिर ड्राइवर खलासी को पीटने लगे। उनका मकसद माहौल बनाना था।मारपीट करने वाले पत्रकार कह रहे थे अब देखते हैं कौन बचाता है। अखिलेश जायसवाल ने अपने दरखास्त में उल्लेख किया है कि – थाने में हो रहे मारपीट के बारे में जब पुलिस स्टाफ से सवाल किया कि थाने में मारपीट कैसे हो रही है तो पुलिस ने हस्तक्षेप करते हुए सभी को हटाया और जांच के बाद कार्यवाही करने का आश्वासन दिया। अखिलेश जायसवाल ने ज्ञापन में यह भी लिखा है कि पुलिस को डर था कि उन्होंने कही घटना की रिकॉर्डिंग तो नहीं कर ली है। कहीं हकीकत न खुल जाए। लेकिन रिकारडिग नहीं होने की भरोसा होने तथा पूर्ण आश्वास्त होने के बाद उन्हें थाने से जाने दिया गया।

बाद में सूत्रों से पता चला कि कुछ तत्व थाना बिश्रामपुर व साइबर पुलिस के साथ मिलकर योजनाबद्ध तरीके से उनके खिलाफ अवैध कोयला ट्रक छुड़ाने के प्रयास में फंसाने की साजिश रच रहे हैं। पत्रकार अखिलेश जायसवाल ने आईजी को बताया कि वे केवल समाचार संकलन के मकसद से थाने में गए थे। लेकिन अनैतिक कृत्य देखकर विरोध किया था। उन्होंने ज्ञापन में मांग किया है कि तथ्यात्मक सच्चाई की जांच कर साजिश रचने वालों पर न्योचित कार्यवाही की जाए।

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