
संवाददाता अमनपथ राजूनाथ जोगी नगरी : कर्णेश्वर महादेव मंदिर सिहावा में आयोजित शिव महापुराण कथा के तृतीय दिवस अंतरराष्ट्रीय कथावाचक गिरी बापू ने शिव भक्ति, शांति और सनातन संस्कृति की महिमा पर गहन एवं भावपूर्ण प्रवचन दिया। कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और पूरा वातावरण हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा। गिरी बापू ने कथा के दौरान कहा कि भगवान की कथा कहना और सुनना स्वयं में शांति का दान है। महाभारत, रामचरितमानस और पुराणों में यही भाव व्यक्त किया गया है कि कथा से मनुष्य के जीवन में सुख, दीर्घायु और मानसिक शांति प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि जो महापुराणों की कथा कहते हैं, उनके प्रति शुभ भावना व्यक्त करना, उनका सम्मान करना सनातन परंपरा है।
उन्होंने कहा कि यदि कोई पूछे कि कथा से क्या मिलता है, तो उत्तर है — शांति।
महादेव की कथा सुनाने और सुनने से जीवन की अशांति दूर होती है। जिनको शांति चाहिए, उन्हें महादेव की साधना, प्रार्थना, भजन, दर्शन और स्मरण करना चाहिए। महादेव स्वयं अत्यंत शांत हैं और जो शांत होता है, वही दूसरों को शांति दे सकता है।
गिरी बापू ने कहा कि मान-सम्मान के लिए किसी से कहना नहीं पड़ता, यदि जीवन में शांति और सद्गुण हों तो मान स्वतः प्राप्त होता है। शास्त्रों में अनेक गुणों की चर्चा है, परंतु यदि मनुष्य अपने जीवन में पांच गुण— शांति, संयम, करुणा, श्रद्धा और सत्य को धारण कर ले, तो जीवन सार्थक हो जाता है।
उन्होंने भगवान विष्णु, नारद और तुलसीदास के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि हर व्यक्ति को शांति की आवश्यकता है और शांति का मार्ग भगवान शिव से होकर जाता है। इसलिए प्रत्येक परिस्थिति में— घर में, वन में, श्मशान में या किसी भी अवस्था में— “ॐ नमः शिवाय” का स्मरण करना चाहिए।कथावाचक ने सनातन धर्म की वैश्विक स्वीकार्यता पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि आज विदेशी नागरिक भी सनातन धर्म की ओर आकर्षित हो रहे हैं और हरे कृष्ण, हरे राम तथा हर-हर महादेव का उच्चारण कर रहे हैं। यह सनातन धर्म की महिमा है।
गिरी बापू ने सिहावा अंचल की प्राकृतिक सुंदरता की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह क्षेत्र शुद्ध हवा, जल, जंगल और पहाड़ों से परिपूर्ण है। आने वाले समय में शहरी लोग भी ऐसे क्षेत्रों की ओर लौटेंगे, जिससे ग्रामीण विकास, कृषि विकास और किसानों का सम्मान बढ़ेगा। उन्होंने किसानों को अन्नदाता बताते हुए कहा कि अन्न खेत में उत्पन्न होता है, किसी फैक्ट्री में नहीं।कथा के दौरान गिरी बापू ने एक प्रेरक प्रसंग सुनाते हुए बताया कि जब सृष्टि के निर्माण के समय भगवान शिव ने सभी को धन, वैभव, बुद्धि और पद दिए, तब एक वस्तु नीचे गिर गई— वह थी शांति। भगवान शिव ने उस पर अपना चरण रख दिया और कहा कि शांति उनके चरणों में है, जिसे साधना से ही प्राप्त किया जा सकता है।
अंत में उन्होंने आयोजन से जुड़े मुकेश बाबा की सराहना करते हुए कहा कि वे परोपकारी हैं और निरंतर पुरुषार्थ व परिश्रम से समाज कल्याण के कार्यों में लगे हुए हैं। ऐसे संत किसी भी क्षेत्र के लिए गौरव होते हैं। कथा का समापन “ॐ नमः शिवाय, हर-हर महादेव” के सामूहिक उच्चारण के साथ हुआ, जिससे वातावरण पूर्णतः शिवमय हो गया।



