तेहरान: ईरान में प्रदर्शनकारियों की करने की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी से तेहरान बेपरवाह दिखाई दे रहा है। उसने अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी वाले अपने पड़ोसियों को चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने हमला किया तो वह उनके यहां स्थित अमेरिकी बेसों पर हमला करेगा। इस धमकी के बाद एहतियात के तौर पर अमेरिका और ब्रिटेन ने कतर स्थित अल उदीद एयर बेस अपने कुछ लोगों को हटा लिया है।
पश्चिमी सैन्य जानकारों का कहना है कि जो संकेत मिल रहे हैं उससे साफ है कि ईरान पर अमेरिकी हमला अवश्यंभावी है। इसी कारण भारत, पोलैंड और इटली समेत विभिन्न देशों ने अपने नागरिकों को ईरान छोड़ने की एडवाइजरी जारी कर दी है।
ट्रंप की चेतावनी के बावजूद ईरान ने हिरासत में लिए गए 26 वर्षीय व्यक्ति इरफान सुल्तानी समेत प्रदर्शनकारियों को फांसी देने के संकेत दिए हैं। ईरानी अधिकारियों ने लगभग तीन हजार लोगों के मारे जाने की बात कही है, हालांकि मानवाधिकार कार्यकर्ता करीब 2,600 लोगों के मारे जाने की बात कह रहे हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप कई दिनों से खुलेआम ईरान में दखल देने की धमकी दे रहे हैं। मंगलवार को उन्होंने ईरानियों से विरोध जारी रखने और सरकारी संस्थाओं पर कब्जा करने की अपील भी की थी और कहा था कि मदद आ रही है। ट्रंप ने ईरानी अधिकारियों के साथ बैठकें रद कर दी हैं।
ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ ट्रंप कूटनीतिक हथियार भी इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने दोहराया कि अगर ईरान ने प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध खूनी कार्रवाई जारी रखी तो उस पर और टैरिफ लगाए जाएंगे।
कुछ यूरोपीय और इजरायली अधिकारियों का कहना है कि अगले 24 घंटों में अमेरिका सैन्य कार्रवाई कर सकता है।न्यूयार्क टाइम्स के अनुसार, अमेरिका और ब्रिटेन ने कतर में एयरबेस से अपने कुछ लोगों को हटाना शुरू कर दिया है। कतर सरकार ने कहा कि यह काम क्षेत्रीय तनाव के जवाब में किया जा रहा है।
पेंटागन के अनुसार, अमेरिका ने अगर सैन्य हमला किया तो सीमित होगा और हाल के महीने में ईरान पर दूसरा हमला होगा। कैरेबियन सागर में अमेरिका के यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड कैरियर और दूसरे एस्कॉर्ट जंगी जहाज पहले से तैनात हैं। साथ ही नौसेना क्षेत्र में तीन मिसाइल दागने वाले डिस्ट्रॉयर हैं, जिनमें यूएसएस रूजवेल्ट शामिल है।
एक ईरानी अधिकारी ने बताया कि तेहरान ने अमेरिकी सहयोगियों सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और तुर्किये से वाशिंगटन को ईरान पर हमला करने से रोकने को कहा है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका ईरान को निशाना बनाता है तो उन देशों में अमेरिकी बेसों पर हमला किया जाएगा।
अधिकारी ने कहा कि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची और अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकाफ के बीच सीधा संपर्क रोक दिया गया है। बता दें कि अमेरिका की सेनाएं पूरे क्षेत्र में हैं, जिनमें कतर के अल उदीद में उसकी सेंट्रल कमान का फारवर्ड हेडक्वार्ट्स और बहरीन में अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े का हेडक्वार्ट्स शामिल है।
ईरानी मीडिया ने बताया कि ईरान की शीर्ष सुरक्षा संस्था के प्रमुख अली लारीजानी ने कतर के विदेश मंत्री से बात की और अराकची ने अपने यूएई व तुर्किये के समकक्षों से बात की।
अराकची ने यूएई के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद से कहा कि शांति बनी हुई है और ईरान अपनी संप्रभुता एवं सुरक्षा की रक्षा करने के प्रति ²ढ़ है। ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और संयुक्त राष्ट्र महासचिव को भी पत्र लिखा है और अमेरिका पर ईरान में हिंसा भड़काने, आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया है।
ईरान के प्रधान न्यायाधीश गुलामहुसैन मोहसेनी-एजेई ने तेहरान की एक जेल का दौरा किया जहां गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों को रखा गया है। उन्होंने कहा कि जिन्होंने लोगों का सिर कलम किया या जलाया, उन्हें दंडित करना महत्वपूर्ण है ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
एजेई ने कहा, ‘अगर हम कुछ करना चाहते हैं, तो हमें उसे जल्दी करना होगा। अगर इसमें दो महीने या तीन महीने की देरी होती है तो इसका उतना असर नहीं पड़ेगा।’ अमेरिका स्थित मानवाधिकार समूह एचआरएएनए ने अब तक 18,137 गिरफ्तारियों की सूचना दी है।
जी-7 देशों के विदेश मंत्रियों ने कहा है कि अगर ईरान ने प्रदर्शनकारियों पर कठोर कार्रवाई करना जारी रखा तो वे अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने के लिए तैयार हैं। जी-7 देशों ने प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध हिंसा के इस्तेमाल की कड़े शब्दों में निंदा भी की।
इंटरनेट बंद होने की वजह से ईरान के अंदर से जानकारी का प्रवाह रुक गया है। एलन मस्क के स्वामित्व वाली कंपनी स्टारलिंक ने मुफ्त इंटरनेट सेवा देने की पेशकश की है। हालांकि कुछ एक्टिविस्ट का कहना है कि जिनके पास उपकरण हैं, उन्हें मुफ्त में सेवाएं मिल रही हैं।
ईरानी सुरक्षा अधिकारी देश में स्टारलिंक के उपकरणों की तलाश कर रहे हैं क्योंकि देश में स्टारलिंक की सेवाओं पर प्रतिबंध है। फ्रांस भी अपने यूटेलसैट सैटेलाइट टर्मिनल के जरिये ईरान में इंटरनेट सेवा प्रदान करने पर विचार कर रहा है।
एक पश्चिमी अधिकारी ने कहा, ऐसा नहीं लगता कि ईरान की सरकार गिरने वाली है क्योंकि उसके सुरक्षा तंत्र का देश पर नियंत्रण बना हुआ है। कार्रवाई से देश में कुछ शांति आई है। ईरान के सरकारी टीवी ने तेहरान, इस्फहान, बुशहर और अन्य शहरों में मारे गए लोगों के अंतिम संस्कार के बड़े जुलूसों की फुटेज प्रसारित की। इसमें लोगों ने झंडे और सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की तस्वीरें और दंगा विरोधी नारों वाले पोस्टर लहराए।



