हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को विशेष महत्व दिया जाता है, जो प्रभु श्रीहरि की कृपा प्राप्ति के लिए एक उत्तम तिथि है। साथ ही इस दिन पर तुलसी का महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि तुलसी प्रभु श्रीहरि को अति प्रिय है। ऐसे में आप इस दिन पर विशेष रूप से तुलसी जी की पूजा-अर्चना कर प्रभु क्षीहरि की भी कृपा प्राप्त कर सकते हैं।
इस तरह करें तुलसी माता की पूजा
जया एकादशी के दिन प्रातः काल में उठकर स्नान आदि से मुक्त होकर साफ-सुथरे कपड़े पहनें।
अब पूजा स्थल की साफ-सफाई कर विधिवत रूप से भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करें।
इस दिन भगवान विष्णु के भोग में तुलसी दल जरूर शामिल करें।
शाम के समय तुलसी के पास घी का दीपक जलाएं और 7 या 11 बार परिक्रम करें।
तुलसी माता की आरती व उनके मंत्रों का जप जरूर करें।
तुलसी जी के मंत्र –
1. महाप्रसाद जननी सर्व सौभाग्यवर्धिनी, आधि व्याधि हरा नित्यं तुलसी त्वं नमोस्तुते।।
2. तुलसी गायत्री – ॐ तुलसीदेव्यै च विद्महे, विष्णुप्रियायै च धीमहि, तन्नो वृन्दा प्रचोदयात् ।।
3. तुलसी नामाष्टक मंत्र –
वृंदा वृंदावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी।
पुष्पसारा नंदनीय तुलसी कृष्ण जीवनी।।
एतभामांष्टक चैव स्त्रोतं नामर्थं संयुतम।
य: पठेत तां च सम्पूज्य सौश्रमेघ फलंलमेता।।
इन गलतियों से करें अपना बचाव
- एकादशी तिथि के दिन तुलसी में जल अर्पित नहीं करना चाहिए और न ही तुलसी के पत्ते उतारने चाहिए।
- एकादशी पर तुलसी के आस-पास साफ-सफाई का विशेष रूप से ध्यान रखें।
- तुलसी के आस-पास भूल से भी जूते-चप्पल, झाड़ू या फिर कूड़ेदान आदि न रखें।
- तुलसी को कभी गंदे या फिर जूठे हाथों से न छूएं।
- एकादशी तिथि पर स्नान करने के बाद ही तुलसी की पूजा करनी चाहिए।
- भगवान विष्णु की पूजा में अर्पित करने के लिए आप एक दिन पहले ही तुलसी के पत्ते उतारकर रख लें।
- एकादशी के दिन तुलसी की पूजा करते समय काले कपड़े न पहनें।



