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पंचक के दौरान लकड़ी खरीदना और दक्षिण दिशा की यात्रा क्यों है अशुभ?

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ज्योतिष शास्त्र में पंचक को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है. मान्यताओं के अनुसार, पंचक के दौरान कुछ खास कामों को करने की सख्त मनाही होती है. पंचांग के मुताबिक, इस बार पंचक की शुरुआत 21 जनवरी को रात 01 बजकर 35 मिनट पर हो चुकी है और इसका समापन 25 जनवरी को दोपहर 01 बजकर 35 मिनट पर होगा. पंचक में एक मान्यता है कि इन पांच दिनों में लकड़ी खरीदना या दक्षिण दिशा में यात्रा करना अशुभ क्यों माना जाता है? आइए इसके पीछे के धार्मिक और ज्योतिषीय कारणों को समझते हैं.

पंचक क्या है:- पंचक हिन्दू पंचांग के अनुसार 5 दिनों का विशेष समय होता है, जिसमें राहु का प्रभाव अधिक होता है. इसे सामान्य दिनों की तुलना में थोड़ा अशुभ समय माना जाता है. इस दौरान शुभ कार्यों में देरी या बाधा आ सकती है. इसलिए धार्मिक और व्यावहारिक मामलों में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है.

दक्षिण दिशा की यात्रा वर्जित क्यों?

1. यमराज की दिशा: दक्षिण दिशा को यमराज (मृत्यु के देवता) की दिशा माना जाता है.

2. दुर्घटना का भय: ज्योतिषियों के अनुसार, पंचक में दक्षिण दिशा की यात्रा करने से दुर्घटना या धन हानि की संभावना रहती है.

3. नक्षत्रों का प्रभाव: पंचक के दौरान चंद्रमा धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्रों में भ्रमण करता है. इन नक्षत्रों के प्रभाव के कारण दक्षिण दिशा की ओर जाना कष्टकारी साबित हो सकता है.

पंचक के दौरान इन 5 कामों से बचें

चारपाई बुनना: पंचक के दौरान बिस्तर या चारपाई बनवाना वर्जित है.

छत डालना: घर की छत का निर्माण नहीं करना चाहिए.

लकड़ी और घास का संचय: किसी भी तरह का ईंधन या सूखी लकड़ी इकट्ठा न करें.

दक्षिण यात्रा: बहुत जरूरी न हो तो दक्षिण दिशा में सफर न करें.

क्या करें अगर काम बहुत जरूरी हो:- यदि लकड़ी खरीदना या दक्षिण दिशा में यात्रा करना बहुत ही अनिवार्य हो, तो ज्योतिष शास्त्र में कुछ उपाय बताए गए हैं. जैसे यात्रा पर निकलने से पहले हनुमान जी के दर्शन करना या गायत्री मंत्र का जाप करना.

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