सुरेश मिनोचा मनेन्द्रगढ़ : नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म के आरोपी के घर पर की गई बुलडोजर कार्रवाई को युवा कांग्रेसनेत्री पूनम सिंह ने प्रदेश सरकार की प्रशासनिक विफलता पर पर्दा डालने की कोशिश करार दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पूरी तरह नाकाम रही है और अब संविधानेत्तर उपायों के जरिए अपनी पीठ थपथपाने का प्रयास कर रही है।
अपराध रोकने में अक्षम है प्रशासन
पूनम सिंह ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य में अपराध का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में महिलाएं असुरक्षित हो गई हैं और प्रदेश में प्रतिदिन औसतन आठ बलात्कार की घटनाएं सामने आ रही हैं।
लूट, हत्या और चाकूबाजी जैसी घटनाएं आम हो चुकी हैं, जिन्हें रोकने में गृह विभाग और पुलिस प्रशासन पूरी तरह असफल साबित हो रहे हैं। सरकार कभी पुलिस प्रणाली में बदलाव (कमिश्नरी सिस्टम) का झुनझुना दिखाती है तो कभी बुलडोजर चलाकर जनता का ध्यान असली मुद्दों से भटकाती है।
फास्ट ट्रैक कोर्ट और फांसी की मांग
कांग्रेसनेत्री ने जघन्य अपराधों पर अपनी स्पष्ट राय रखते हुए कहा कि नाबालिग से दुष्कर्म करने वाले दुर्दांत अपराधियों के प्रति कोई सहानुभूति नहीं होनी चाहिए। ऐसे मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से त्वरित सुनवाई कर फांसी की सजा दी जानी चाहिए, ताकि समाज में कानून का भय स्थापित हो।उन्होंने कहा कि सजा देने का अधिकार अदालत का है, प्रशासन का नहीं।
सरकार से सीधे सवाल
बुलडोजर कार्रवाई की मंशा पर सवाल उठाते हुए पूनम सिंह ने कहा—
यदि आरोपी का मकान अवैध था, तो प्रशासन ने किसी जघन्य अपराध के होने का इंतजार क्यों किया?क्या कार्रवाई से पहले सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार 15 दिन का नोटिस और पक्ष रखने का अवसर दिया गया?क्या किसी एक व्यक्ति के अपराध के लिए उसके पूरे निर्दोष परिवार को बेघर करना न्यायसंगत है?विध्वंस न्याय नहीं है पूनम सिंह ने कहा कि अवैध निर्माण पर कार्रवाई और दुष्कर्म की सजा—ये दोनों अलग-अलग विषय हैं। इन्हें जोड़कर ‘मैसेज’ देने की कोशिश सरकार की अक्षमता को छुपाने का प्रयास है। उन्होंने सरकार से बुलडोजर की राजनीति छोड़कर बेटियों को वास्तविक सुरक्षा देने और अपराध रोकने के ठोस उपाय करने की मांग की।



