
हर साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि के दिन महाशिवरात्रि का पावन पर्व मनाया जाता है. इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का मिलन हुआ था. महाशिवरात्रि के दिन देश के शिव मंदिरों में भक्त महादेव के दर्शन और पूजन के लिए पहुंचते हैं. इस दिन महादेव की नगरी काशी का नजारा बहुत ही अद्भुत होता है. महाशिवरात्रि के दिन व्रत और रात में शिव जी की चार पहर की पूजा की जाती है.हालांकि, इस बार लोगों के मन में ये संशय है कि महाशिवरात्रि का पर्व 15 को मनाया जाएगा या 16 फरवरी को. कुछ लोगों का कहना है कि ये पर्व 15 फरवरी को मनाया जाएगा. वहीं कुछ इस पर्व को 16 फरवरी को मनाने की बात भी कह रहे हैं, तो आइए जानते हैं कि महाशिवरात्रि 15 फरवरी या 16 फरवरी, किस डेट को मनाना सही होगा? साथ ही जानते हैं रात्रि के चारों पहर की पूजा का मुहूर्त, विधि और महत्व.
महाशिवरात्रि 2026 कब है:- इस साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी को शाम 05 बजकर 04 मिनट पर शुरू हो रही है. वहीं इस तिथि का समापन 16 फरवरी को शाम 05 बजकर 34 मिनट पर होगा. महाशिवरात्रि की पूजा में रात्रिकाल का चार प्रहर और निशीथ काल मान्य होता है. इस पर्व में उदयातिथि का नियम लागू नहीं होता है. ऐसे में 15 फरवरी की रात महाशिवरात्रि की रात होगी, इसलिए इस साल 15 फरवरी को महाशिवरात्रि मनाई जाएगी.
महाशिवरात्रि का महत्व:- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन शिव और शक्ति एक हुए थे. शास्त्रों के अनुसार, महाशिवरात्रि पर शिव ने वैराग्य जीवन छोड़कर गृहस्थ जीवन अपनाया था. शिव पुराण के अनुसार, महाशिवरात्रि पर ही भगवान शिव पहली बार ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए थे. इसलिए महाशिवरात्रि की रात किया गया जप और ध्यान बाकी दिनों की तुलना में हजार गुना अधिक फल देने वाला माना जाता है.
चार पहर की पूजा मुहूर्त
1. महाशिवरात्रि के दिन प्रथम पहर की पूजा शाम 06 बजे से रात 09 बजे तक की जाएगी.
2.द्वितीय पहर की पूजा रात 09 से 12 बजे तक की जाएगी.
3. तृतीय पहर की पूजा रात 12 से 03 बजे तक की जाएगी.
4. चतुर्थ पहर की पूजा भोर में 03 से सुबह 6 बजे तक होगी.
महाशिवरात्रि पूजन विधि
1. महाशिवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें.
2. फिर साफ वस्त्र धारण करें.
3. इसके बाद शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प करें.
4. घर के मंदिर या नजदीकी शिवालय में शिवलिंग पर सबसे पहले शुद्ध जल चढ़ाएं.
5. फिर दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से पंचामृत बनाकर शिवलिंग का अभिषेक करें.



