Home आस्था जल और बेल पत्र,भगवान शिव पर क्यों चढ़ाया जाता है जानें महत्व….

जल और बेल पत्र,भगवान शिव पर क्यों चढ़ाया जाता है जानें महत्व….

0

महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का एक बेहद पावन और महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन भक्त पूरे श्रद्धा भाव से भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं, व्रत रखते हैं और शिवलिंग पर जल, दूध, बेल पत्र, धतूरा और भस्म अर्पित करते हैं। खासतौर पर जल और बेल पत्र चढ़ाने की परंपरा का विशेष महत्व बताया गया है। तो चलिए जानते हैं कि भगवान शिव पर जल और बेल पत्र क्यों चढ़ाए जाते हैं और इसके पीछे की पौराणिक मान्यताएं क्या हैं।

महाशिवरात्रि 2026 का महत्व क्या है:- महाशिवरात्रि भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का पर्व माना जाता है। इस दिन की गई पूजा से जीवन में सुख, शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है। माना जाता है कि इस दिन शिवलिंग पर विधि-विधान से जलाभिषेक करने से भोलेनाथ जल्दी प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

भगवान शिव पर जल क्यों चढ़ाया जाता है:- पौराणिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के समय जब विष निकला, तो पूरी सृष्टि को बचाने के लिए भगवान शिव ने वह विष अपने कंठ में धारण कर लिया। विष की तपन को शांत करने के लिए देवताओं ने भगवान शिव पर जल चढ़ाया। तभी से शिवलिंग पर जल अर्पित करने की परंपरा चली आ रही है। इसके अलावा धार्मिक मान्यता है कि जल जीवन का प्रतीक है। शिवलिंग पर जल चढ़ाने से मन की शुद्धि होती है, नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और मानसिक शांति मिलती है। नियमित रूप से जलाभिषेक करने से रोग, कष्ट और तनाव भी कम होते हैं।

भगवान शिव को बेल पत्र क्यों प्रिय है:- बेल पत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान माता लक्ष्मी के पसीने की बूंदें धरती पर गिरीं, जिससे बेल वृक्ष उत्पन्न हुआ। इस वृक्ष के पत्ते भगवान शिव को अर्पित किए जाने लगे। एक अन्य मान्यता के अनुसार, बेल पत्र के तीन पत्ते त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक हैं। इसे चढ़ाने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।

महाशिवरात्रि पर जलाभिषेक करने की सही विधि क्या है:- महाशिवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। साफ वस्त्र धारण करें और शिवलिंग पर पहले जल, फिर दूध, दही, शहद और घी से अभिषेक करें। इसके बाद बेल पत्र, धतूरा, भस्म और सफेद फूल अर्पित करें। अंत में “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें। महाशिवरात्रि पर भगवान शिव पर जल और बेल पत्र चढ़ाना सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि इसके पीछे गहरा आध्यात्मिक और पौराणिक महत्व छिपा है। सच्चे मन और श्रद्धा से की गई पूजा से भोलेनाथ जल्दी प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों पर कृपा बरसाते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here