
दंतेवाड़ा: तकरीबन छः दशक से अधिक वर्षो से एनएमडीसी परियोजना बस्तर एवं देशभर में संचालित है जिसमे किरन्दुल स्थित 14नं खदान को इसका “मदर माइंस” कहा जाता है, अर्थात जननी कहा जाता है जहाँ से एनएमडीसी ने अपने कार्य की शुरुवात की थी और जिसकी बदौलत आज एनएमडीसी खुद को एक नवरत्न के रूप में स्थापित कर पाई है । एनएमडीसी आज देशभर में उच्चतम किस्म के लौह अयस्क के लिए जाना जाता है । एनएमडीसी परियोजना के यहाँ स्थापित होने से कई स्थानीय युवाओ को यहाँ रोज़गार भी मिला है, परन्तु कुछ समय से जबसे एनएमडीसी के नगरनार स्थित स्टील प्लांट के विनिवेशीकरण की बातें चर्चा में आई है तबसे एनएमडीसी पर भी निजीकरण का मुद्दा गर्माने लगा है । हालांकि समय समय पर इसका कांग्रेस पार्टी हमेशा विरोध करती आई है । परंतु अब स्थिति ऐसी है एनएमडीसी परियोजना ने अपने तौर-तरीके बदल लिए है ।
कांग्रेस कमिटी के जिला प्रवक्ता राहुल महाजन ने कहा कि जिस तरह से नगरनार स्टील प्लांट के एकमुश्त विनिवेशीकरण के मुद्दे पर निजीकरण के विरोध में स्वर उठे है तो इससे निजात पाने एनएमडीसी परियोजना अब आंतरिक तौर पर दीमक की तरह खुद को खोखला करने पर तुली हुई है ।राहुल ने आगे कहा कि एनएमडीसी परियोजना के इन सब फैसलों पर केंद्र सरकार के दखल को भी नजरअंदाज नही किया जा सकता है, क्योंकि एनएमडीसी परियोजना सीधे केंद्र सरकार के स्टील मंत्रालय के अंतर्गत आती है तो जो “वेस्ट माइनिंग” के फैसले लिए गए है उसमें एनएमडीसी परियोजना प्रबंधन और भाजपा केंद्र शासन की मिली भगत को भी नज़रंदाज़ नही किया जा सकता है ।
वर्तमान में किरन्दुल स्थित खदान निक्षेप क्र. 14 एवं 11C में क्रमशः रॉकटेक कंपनी एवं देव माइंस को तो वही बचेली के खदान निक्षेप क्र. 05 में भी देव माइंस को यह ठेका दिया गया है जिस पर जिला प्रवक्ता राहुल महाजन ने सवाल उठाते कहा है कि जब एनएमडीसी परियोजना इतने वर्षों से इस कार्य को करते आ रही है और एक नवरत्न कम्पनी होने के नाते जब स्वयं सक्षम है तो ऐसे में ठेकेदार प्रथा को बढ़ावा देना सही है या कोई साजिश ?? इससे एनएमडीसी परियोजना में कर्मचारियों के काम की कटौती तो हो ही रही है साथ ही भविष्य में रोजगार के रास्ते भी बंद होते जा रहे है । राहुल महाजन ने आरोप लगाते हुए कहा कि वेस्ट माइनिंग का कार्य कर रही रॉकटेक एवं देव माइनिंग बाहर से आ के यहां पर अपने क्षेत्रों से ड्राइवर और कर्मचारी बुला कर इस काम को करवा ही रहे है साथ ही बाहरी मशीनों के आ जाने से स्थानीय लोगो के मशीनों को भी उचित किराया नही मिल पा रहा है । एनएमडीसी परियोजना की यह कार्यशैली स्थानीय लोगो की आवाज़ दबा कर उनके रोज़गार और जीविकोपार्जन के साधन के साथ तो खिलवाड़ कर ही रही है साथ ही ऐसी स्थिति उत्पन्न की जा रही है जिससे भविष्य में एनएमडीसी स्वयं का निजीकरण कर सके और जवाब में यह कह सके कि हमारे पास ऐसे कार्य करने के लिए न कोई अनुभव है और न ही प्रशिक्षित कर्मचारी । देश के विकास के उद्देश्य से देश के पहले प्रधनमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू जी द्वारा स्थापित केंद्र शासकीय उपक्रम एनएमडीसी प्रशासन अब हाल के समय मे खुद को पूरी योजनाबद्ध तरीके से इस नवरत्न कंपनी को निजीकरण के खाई में धकेलने की तैयारी कर रही है ।



