
फाल्गुन का महीना बेहद पावन होता है। यह महीना देवों के देव महादेव को समर्पित होता है। इस महीने में महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और मां पार्वती की भक्ति भाव से पूजा की जाती है। साथ ही महाशिवरात्रि का व्रत रखा जाता है। इसके साथ ही कई अन्य प्रमुख पर्व फाल्गुन महीने में मनाए जाते हैं।
कब है ढुण्ढिराज चतुर्थी?
हर साल फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के अगले दिन ढुण्ढिराज चतुर्थी मनाई जाती है। इस साल शनिवार 21 फरवरी को ढुण्ढिराज चतुर्थी है। इस शुभ अवसर पर भगवान गणेश की पूजा की जाएगी।
हर साल फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के अगले दिन ढुण्ढिराज चतुर्थी मनाई जाती है। इस साल शनिवार 21 फरवरी को ढुण्ढिराज चतुर्थी है। इस शुभ अवसर पर भगवान गणेश की पूजा की जाएगी।
ढुण्ढिराज चतुर्थी शुभ मुहूर्त वैदिक पंचांग के अनुसार, 20 फरवरी को दोपहर 02 बजकर 38 मिनट पर फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी की शुरुआत होगी। वहीं, 21 फरवरी को दोपहर 01 बजे फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि का समापन होगा। सनातन धर्म में सूर्योदय से तिथि की गणना की जाती है। इसके लिए 21 फरवरी को विनायक चतुर्थी मनाई जाएगी।
ढुण्ढिराज चतुर्थी शुभ योग फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर कई मंगलकारी संयोग बन रहे हैं। इन योग में शिव परिवार की पूजा की जाएगी। इस शुभ अवसर पर शुभ, शुक्ल और रवि योग का संयोग है। शुक्ल योग का संयोग रात भर है। वहीं, रवि योग शाम 07 बजकर 07 मिनट तक है। इन योग में भगवान गणेश की पूजा करने से साधक के सुख और सौभाग्य में वृद्धि होगी।
पंचांग
- सूर्योदय – सुबह 06 बजकर 54 मिनट पर
- सूर्यास्त – शाम 06 बजकर 15 मिनट पर
- चन्द्रोदय- सुबह 08 बजकर 56 मिनट पर
- चन्द्रास्त- रात 10 बजकर 16 मिनट पर
- ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 05 बजकर 13 मिनट से 06 बजकर 04 मिनट तक
- विजय मुहूर्त – दोपहर 02 बजकर 28 मिनट से 03 बजकर 14 मिनट तक
- गोधूलि मुहूर्त – शाम 06 बजकर 13 मिनट से 06 बजकर 38 मिनट तक
- निशिता मुहूर्त – रात 12 बजकर 09 मिनट से 01 बजे तक



