
नई दिल्ली : राष्ट्रीय स्तर की गेट (जेएटीई) में नकल कांड की जांच में आरोपितों की बेखौफ योजना सामने आई है। पुलिस के डर से दूर छिपने के बजाय गिरोह ने परीक्षा केंद्र आइओएन डिजिटल जोन से महज 50 मीटर दूर एक चाय-नाश्ते के ठेले को ही अपना ‘कंट्रोल रूम’ बना लिया था।
आरोपित दर्शन सहवाग सामान्य ग्राहक की तरह भीड़ में बैठा मोबाइल के जरिए परीक्षार्थियों से लगातार संपर्क में था। इतनी कम दूरी के कारण ब्लूटूथ कनेक्टिविटी मजबूत रही और अंदर बैठे परीक्षार्थियों तक साफ आवाज पहुंचती रही। प्रश्न मिलते ही बाहर बैठी टीम गूगल व अन्य स्त्रोतों से जवाब खोजकर तुरंत भेज देती थी।
गिरफ्तार अभियुक्त अमर जम्मू के चिनाब वैली पावर प्रोजेक्ट में असिस्टेंट इंजीनियर है, जबकि लक्ष्मीनारायण हरियाणा की निजी कंपनी में कार्यरत है। दोनों को एक से डेढ़ लाख रुपये मासिक वेतन मिलता है। बेहतर भविष्य के लिए एमटेक का सपना लेकर आए इन इंजीनियरों ने मेहनत की जगह शार्टकट चुना और अब उनकी नौकरी पर संकट है।
पुलिस ने बताया कि तीन परीक्षार्थियों अपने जूतों में बेहद छोटे (सूक्ष्म) ब्लूटूथ डिवाइस छिपाकर परीक्षा केंद्र के अंदर ले गए थे। ये डिवाइस इतने छोटे थे कि सामान्य जांच में पकड़ में नहीं आए। परीक्षा हाल में बैठे ये अभ्यर्थी धीरे-धीरे से प्रश्न पढ़ते थे और जूतों में छिपे ब्लूटूथ डिवाइस के जरिये यह आवाज केंद्र के बाहर बैठे सहयोगियों तक पहुंचती थी।
बाहर बैठे आरोपित तुरंत गूगल सर्च कर प्रश्न का सही उत्तर निकालते थे। इसके बाद ब्लूटूथ के जरिये उत्तर वापस अंदर बैठे परीक्षार्थी को बताते थे। इस काम के बदले परीक्षार्थियों ने दो-दो लाख रुपये दिए थे।
सरोना स्थित सेंटर के बाहर से हुई गिरफ्तारीपुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि रायपुर के सरोना स्थित आइओएन डिजिटल जोन के आसपास कुछ लोग संदिग्ध हालत में घूम रहे हैं। पुलिस ने घेराबंदी कर तलाशी ली तो उनके पास से इलेक्ट्रानिक उपकरण बरामद हुए। कड़ाई से पूछताछ करने पर उन्होंने पूरी साजिश कबूली। इसके बाद पुलिस ने केंद्र प्रबंधन की मदद से संदेह के आधार पर कुछ परीक्षार्थियों की भी तलाशी ली, जिनके पास से ब्लूटूथ डिवाइस मिले।



