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पिता राष्ट्रपति, मां प्रधानमंत्री, अब बेटा PM… बांग्लादेश के इतिहास में पहली बार एक ही परिवार की तीसरी पीढ़ी देश की संभालने जा रही सल्तनत

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 आज 17 फरवरी 2026 का दिन बांग्लादेश के इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो जाएगा. जिया परिवार की ‘सल्तनत’ आखिरकार फिर सत्ता पर काबिज हो रही है. पिता जियाउर रहमान राष्ट्रपति थे, मां खालिदा जिया तीन बार प्रधानमंत्री बनीं, और अब बेटा तारिक रहमान प्रधानमंत्री बनकर सत्ता की कमान संभाल रहे हैं.

बीएनपी (बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी) के चेयरमैन तारिक रहमान आज दोपहर जतिया संसद के साउथ प्लाजा में शपथ लेंगे. ये पहली बार है जब एक ही परिवार की तीसरी पीढ़ी देश की सत्ता पर काबिज हो रही है.

बांग्लादेश में जिया युग का फिर उदय!
बांग्लादेश की राजनीति में हमेशा से ही दो बड़े परिवारों का बोलबाला रहा है. शेख परिवार और जिया परिवार. लेकिन अब जिया परिवार ने इतिहास रच दिया है. पिता राष्ट्रपति, मां प्रधानमंत्री और अब बेटा PM. ये कोई फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि हकीकत है जो बांग्लादेश को नई दिशा दे सकती है. तारिक रहमान, जो 17 साल लंदन में निर्वासन में रहे, अब देश की कमान संभालने को तैयार हैं. उनकी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने फरवरी 2026 के चुनावों में भारी बहुमत से जीत हासिल की. ये चुनाव 2024 की उस छात्र-क्रांति के बाद हुए, जिसमें शेख हसीना की सरकार उखड़ गई थी. अब समझते हैं जिया परिवार का सफरनामा.

जिया खानदान का राजसी सफर: पिता से बेटे तक
जिया परिवार की कहानी 1970 के दशक से शुरू होती है. तारिक के पिता जियाउर रहमान सेना के अफसर थे, जो बांग्लादेश की आजादी की लड़ाई में शामिल हुए. 1977 में वो राष्ट्रपति बने, लेकिन 1981 में उनकी हत्या हो गई. तब तारिक महज 15 साल के थे.उनकी मां खालिदा जिया ने पति की मौत के बाद राजनीति में कदम रखा. वो 1991 में देश की पहली महिला PM बनीं और कुल तीन बार इस पद पर रहीं.

खालिदा का निधन, बेटे की एंट्री
खालिदा की आखिरी सरकार 2001-2006 तक चली, लेकिन उसके बाद शेख हसीना से उनकी दुश्मनी जगजाहिर हो गई. दोनों महिलाओं ने बारी-बारी से सत्ता संभाली, लेकिन जिया परिवार हमेशा विपक्ष में मजबूत रहा. दिसंबर 2025 में खालिदा का निधन हो गया, ठीक तारिक की वापसी के कुछ दिनों बाद.अब तारिक इस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं.

निर्वासन से सत्ता तक: तारिक की मुश्किल यात्रा
तारिक रहमान की जिंदगी आसान नहीं रही. 2007 में शेख हसीना की सरकार ने उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए, जिसके चलते वो लंदन भाग गए. वहां से उन्होंने पार्टी को दूर से चलाया, लेकिन कभी हार नहीं मानी. 2024 की छात्र क्रांति ने सब बदल दिया. हसीना की सरकार गिर गई, और अंतरिम सरकार ने चुनाव कराए. तारिक दिसंबर 2025 में लौटे, और जनवरी 2026 में BNP की कमान संभाली. चुनाव में BNP ने 300 में से 200 से ज्यादा सीटें जीतीं. यह चुनाव कई मायनों में पहला था, जहां दोनों बड़ी बेगम (हसीना और खालिदा) गायब थीं, और तारिक ने dynastic politics को नया जीवन दिया.

17 साल का एक्साइल, पीएम की शपथ
17 फरवरी को तारिक रहमान के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने की तैयारी पूरी कर ली गई है. BNP समर्थकों के लिए यह ऐतिहासिक पल माना जा रहा है. तारिक रहमान पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे और पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान के उत्तराधिकारी अब बांग्लादेश के सुल्तान बनने वाले हैं. इसी के साथ बांग्लादेश में ‘जिया युग’ की नई शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है.

नई सल्तनत की चुनौतियां: क्या तारिक साबित करेंगे खुद को?
तारिक ने जीत के बाद कहा कि वो अर्थव्यवस्था सुधारेंगे, कानून-व्यवस्था मजबूत करेंगे और लोकतंत्र बहाल करेंगे. लेकिन सवाल ये हैं क्या ये फिर राजवंश की सत्ता होगी या असली बदलाव आएगा? 2024 की छात्र क्रांति ने शेख हसीना को हटाया था, अब युवा उम्मीद कर रहे हैं कि तारिक पुरानी गलतियां नहीं दोहराएंगे.

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