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कौन हैं रिक वोल्डनबर्ग, कैसे एक टॉयमेकर ने टैरिफ पर ट्रंप को दी सुप्रीम कोर्ट में मात?

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 नई दिल्ली :  अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक आपातकालीन टैरिफ को अवैध घोषित कर दिया है। इस फैसले के बाद सबसे अधिक किसी नाम की चर्चा हो रही है तो वह है, रिक वोल्डनबर्ग, जो ट्रंप की आक्रामक टैरिफ नीति के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पहुंचे।

दरअसल, टैरिफ की मार और सप्लाई चेन की अनिश्चितता के बीच, लर्निंग रिसोर्सेज के सीईओ रिक वोल्डनबर्ग ने एक ऐतिहासिक कानूनी लड़ाई का नेतृत्व किया है। रिक वोल्डनबर्ग ने ट्रंप प्रशासन के IEEPA कानून के इस्तेमाल को चुनौती देते हुए, तर्क दिया कि ये नीतियां बड़ी कंपनियों के लिए नहीं बल्कि उन मध्यम वर्गीय उद्योगों के लिए काल हैं जो पीढ़ियों से चल रहे हैं।

कौन हैं रिक वोल्डनबर्ग?ट्रंप की टैरिफ को चुनौती देने वाले रिक वोल्डनबर्ग शिकागो में एक पारिवारिक टॉय कंपनी चलाते हैं। ट्रंप प्रशासन के ‘लिबरेशन डे’ टैरिफ की घोषणा के कुछ ही दिनों के भीतर उन्होंने वकीलों से संपर्क कर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ मुकदमा दायर किया। इस केस में सुप्रीम कोर्ट से उनको जीत मिली है और राष्ट्रपति ट्रंप को हार।

उन्होंने कोर्ट में तर्क दिया था कि टैरिफ छोटे और मिड-साइज बिजनेस को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रहे हैं, जबकि बड़ी कंपनियां लॉबिंग और संसाधनों के दम पर खुद को बचा लेती हैं।

रिक वोल्डनबर्ग ने क्यों उठाया ऐसा कदम?वोल्डनबर्ग की कंपनी अपने ज्यादातर एजुकेशनल खिलौने एशिया में बनाती है। ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए IEEPA कानून के तहत टैरिफ के कारण लागत में अचानक बढ़ोत्तरी हो गई और कंपनी को नुकसान का सामना करना पड़ा।

जिसके चलते वोल्डनबर्ग ने या वेयरहाउस प्रोजेक्ट नई भर्ती रोक दी। यही नहीं उनकी कंपनी को मार्केटिंग बजट में भी कटौती करनी पड़ी। ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ के बाद उन्हें इस बात का एहसास हो गया था कि कंपनी छोटी हो जाएगी और कम कमाई करेगी, और वही हुआ।

वोल्डनबर्ग की कंपनी पर सबसे ज्यादा असर लोकप्रिय प्रोडक्ट ‘BubblePlush Yoga Ball Buddies’ पर पड़ा। टैरिफ शुल्क के उतार-चढ़ाव के बीच उनकी कंपनी को कभी भारत शरणार्थियों’ की तरह अलग-अलग देशों में उत्पादन शिफ्ट करने को मजबूर हो गई थी।

यह समस्या सिर्फ उनकी ही कंपनी के लिए नहीं बल्कि अन्य अमेरिकी कंपनियों के लिए भी थी। लेकिन बड़े अमेरिकी कॉरपोरेट्स इस कानूनी लड़ाई से दूरी बनाए रहे। एक्सपर्ट के अनुसार, बड़ी कंपनियों के पास कैश रिजर्व और सप्लाई चेन मैनेजमेंट की क्षमता होती है, इसलिए वे सीधे कोर्ट जाने के बजाय लॉबिंग पर जोर देती हैं।

सुप्रीम कोर्ट में क्या दिया तर्क?वोल्डनबर्ग के साथ दर्जनों छोटे व्यवसाय और कुछ गैर-लाभकारी संगठन खड़े हुए। कोर्ट में कंपनियों का तर्क था कि 1977 का IEEPA कानून राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने की अनुमति नहीं देता। अमेरिका की निचली अदालतों ने भी ट्रंप की टैरिफ को कानून का उल्लंघन बताया था।

रिक वोल्डनबर्ग के अनुसार, इस मुकदमे के चक्कर में उनकी कानूनी फीस करोड़ों डॉलर में पहुंच गई, लेकिन इसे उन्होंने महत्वपूर्ण समझाष। लाखों अमेरिकी कारोबारियों में वोल्डनबर्ग एक अकेले ऐसे कारोबारी हैं, जिन्होंने अपने दम पर राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ मुकदमा लड़ने का जोखिम उठाया। यूं तो इस लिस्ट में कई नाम हैं, लेकिन वोल्डनबर्ग उनमें सबसे खास हैं।

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