
नई दिल्ली : अमेरिका के साथ ट्रेड डील में किसानों के साथ देश के हितों की बलि देने का आरोप लगाते हुए सरकार पर वार कर रही कांग्रेस ने अब इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाने की घोषणा की है।
इस क्रम में पार्टी ने ट्रेड डील के खिलाफ किसानों और लोगों के बीच देश के अलग-अलग हिस्सों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन, रैलियां तथा किसान सम्मेलन करने का फैसला किया है। अभियान के तहत पार्टी किसानों का पहला सम्मेलन 24 फरवरी को भोपाल में करेगी जिसमें कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व भी हिस्सा लेगा।
लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी के साथ पार्टी महासचिवों तथा राज्यों के प्रभारी भी बैठक में मौजूद थे। इस बैठक के बाद कांग्रेस के संचार महासचिव जयराम रमेश ने पत्रकारों से कहा कि अमेरिका से हुए व्यापार समझौते से किसानों पर पड़ने वाले प्रतिकूल असर को देखते हुए इन छह राज्यों में एक व्यवस्थित जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
ट्रेड डील पर लोगों की राय जुटाने और प्रभावित किसानों से सीधे जुड़ने के लिए पार्टी किसान सम्मेलनों की श्रृंखला आयोजित करेगी। 24 फरवरी को भोपाल में होने वाले पहले किसान सम्मेलन में खरगे और राहुल गांधी दोनों शामिल होंगे।जयराम ने कहा कि सात मार्च को महाराष्ट्र के यवतमाल में दूसरा किसान सम्मेलन होगा।
साथ ही दोनों शीर्ष नेताओं ने जोर देकर कहा कि तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के लंबे आंदोलन की तरह किसान संगठनों के साथ मिलकर कांग्रेस लाखों किसानों की रोजी-रोटी पर आने वाले खतरों को उजागर करेगी। ट्रेड डील के खिलाफ दूसरे चरण का अभियान संसद के बजट सत्र के समापन के बाद शुरू होगा।
मल्लिकार्जुन खरगे ने इस बैठक के बाद एक्स पोस्ट में कहा छह राज्यों के कांग्रेस अध्यक्षों-विधायक दल नेताओं के साथ बैठक में भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर गंभीर चर्चा हुई और यह स्पष्ट है कि इस ट्रैप डील में मोदी सरकार ने किसानों के हितों से समझौता किया है।
इस डील का सीधा असर कपास, सोयाबीन, मक्का किसानों और फल-मेवा उत्पादकों पर पड़ेगा। किसानों के हक की रक्षा के लिए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ‘किसान सम्मेलन’ आयोजित कर इस मुद्दे को गांव-गांव तक लेकर जाएगी।
राहुल गांधी ने किया था पोस्टइससे पहले राहुल गांधी ने भी एक्स पर व्यापार समझौते पर संसद में अपने भाषण का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि अमेरिकियों को खुश करने के लिए हमारे किसानों की कुर्बानी क्यों दी गई और अमेरिका को हमारे तेल आयात तय करने देकर भारत की ऊर्जा सुरक्षा से समझौता क्यों किया गया?
बिना किसी पारस्परिक वादे के हर साल 100 बिलियन डालर का अमेरिकी आयात बढ़ाने पर सहमति क्यों दी गई? राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि पीएम मोदी ट्रंप के दबाव में किसानों और देश के हितों से समझौता कर रहे हैं।



