
हर साल फाल्गुन माह की पूर्णिमा पर होलिका दहन किया जाता है. फिर अगले रोज रंगों से होली खेली जाती है. इस साल फाल्गुन माह की पूर्णिमा बड़ी विशेष है, क्योंकि इसी दिन साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने वाला है. 03 मार्च को फालगुन पूर्णिमा के दिन होलिका दहन किया जाएगा. इसी दिन चांद को ग्रहण भी लगेगा. ये ग्रहण साल का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण होगा, जिसकी अवधि 03 घंटे 27 मिनट होगी.चंद्र ग्रहण सिंह राशि और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में लगेगा. ये ग्रहण भारत में नजर आएगा और इसका सूतक काल भी मान्य होगा. ऐसे में आइए जानते हैं कि चंद्र ग्रहण के बीच होलिका दहन किस समय जाएगा. 03 मार्च को होलिका दहन का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा? साथ ही जानते हैं इसकी विधि.
फाल्गुन पूर्णिमा 2026 तिथि:- पंचांग के अनुसार, इस साल फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि 2 मार्च की शाम 05 बजकर 55 मिनट पर शुरू हो रही है. इस पूर्णिमा तिथि का समापन अगले दिन 03 मार्च को शाम 05 बजकर 07 मिनट पर होगा. ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, इस साल होलिका दहन का त्योहार 03 मार्च को मनाया जाएगा.
चंद्र ग्रहण 2026 का समय:- वहीं इस साल चंद्र ग्रहण की शुरुआत 03 मार्च को दोपहर 03 बजकर 20 मिनट पर होगी. इस चंद्र ग्रहण का समापन शाम को 06 बजकर 47 मिनट पर हो जाएगा.
होलिका दहन 2026 का शुभ मुहूर्त:- चंद्र ग्रहण को देखते हुए पंडितों और ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, होलिका जलाने का शुभ समय 03 मार्च को शाम 06 बजकर 22 मिनट से लेकर रात 08 बजकर 50 मिनट तक रहेगा.
होलिका दहन की विधि:- होलिका दहन के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें. इसके बाद व्रत का संकल्प लें और मन में भगवान से प्रार्थना करें. फिर जिस स्थान पर होलिका दहन हौना है, उसे पहले साफ-सुथरा कर लें और वहां लकड़ियां, उपले आदि सजाकर होलिका की व्यवस्था करें. पूजन के लिए रोली, अक्षत, फूल, माला, नारियल, कच्चा सूत, हल्दी, गुलाल, गेहूं की बालियां, जौ, चने, गोबर के उपले और जल आदि सामग्री एकत्र करें. कच्चा सूत होलिका के चारों ओर लपेटें, रोली-अक्षत अर्पित करें और जल चढ़ाएं. इसके बाद होलिका में अग्नि प्रज्वलित करें. अग्नि प्रज्वलित होने के बाद पूरे परिवार के साथ होलिका की तीन या सात परिक्रमा करें.



