
आप भी अपने किचन में एल्युमिनियम के बर्तनों का इस्तेमाल करते हैं? कई लोगों के मन में इन बर्तनों में खाना पकाने को लेकर काफी डर होता है। आम धारणा है कि इनसे लॉन्ग टर्म में ब्रेन डैमेज हो सकता है, किडनी डिजीज की शिकायत हो सकती है और इतना ही नहीं, इनके इस्तेमाल को कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी से जोड़कर भी देखा जाता है। ऐसे में, आइए डॉ. वर्तिका विश्वानी (कंसल्टेंट सर्जिकल ऑन्कोलॉजी आर्टेमिस अस्पताल, गुरूग्राम) से इसका असली सच जानते हैं।
क्या वाकई एल्युमिनियम के बर्तन बढ़ा रहे हैं कैंसर का खतरा?
एल्युमिनियम एक रिएक्टिव मेटल है, लेकिन जब यह हवा के संपर्क में आता है, तो अपने ऊपर ‘एल्युमिनियम ऑक्साइड’ की एक पतली परत बना लेता है। यह परत एक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है और धातु को आपके खाने में ज्यादा मिलने से रोकती है। यह सच है कि एल्युमिनियम की कुछ मात्रा खाने में मिल सकती है- खासकर तब, जब आप खट्टी चीजें (जैसे टमाटर या इमली) पका रहे हों या बर्तन में खरोंचें हों, लेकिन डॉक्टर के मुताबिक आपको घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह मात्रा विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा तय की गई सुरक्षित सीमा (2 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम शरीर का वजन प्रति सप्ताह) से बहुत नीचे होती है।
आपने कई डरावनी बातें सुनी होंगी, लेकिन वैज्ञानिक रूप से ऐसा कोई मजबूत सबूत नहीं है जो एल्युमिनियम के बर्तनों को कैंसर से जोड़ता हो। बड़े मानव अध्ययनों में इसका अल्जाइमर बीमारी के साथ भी कोई सीधा संबंध साबित नहीं हुआ है। इसके अलावा, एक स्वस्थ इंसान की किडनी शरीर में जाने वाले इस थोड़े से एल्युमिनियम को आसानी से शरीर के बाहर निकाल देती है।
किन्हें रहना चाहिए सावधान?जिन लोगों को किडनी की गंभीर बीमारी है (जिनकी किडनी की काम करने की क्षमता कम हो गई है), केवल उन्हें ही इसके इस्तेमाल को लेकर थोड़ी सावधानी बरतनी चाहिए। बचाव के लिए:
- सादे एल्युमिनियम के बर्तन में ज्यादा देर तक बहुत खट्टा खाना पकाने से बचें।
- एनोडाइज्ड एल्युमिनियम के बर्तनों का चुनाव करें,क्योंकि उनकी परत ज्यादा मजबूत, कठोर और सुरक्षित होती है।
- अगर आपके बर्तन पर बहुत ज्यादा खरोंचें आ गई हों, तो उसे तुरंत बदल दें।
अक्सर सच से ज्यादा तेजी से डर फैलता है। विज्ञान सीधा-सा जवाब देता है, अगर आप सही तरीके और संतुलन के साथ एल्युमिनियम के बर्तनों का इस्तेमाल करते हैं, तो यह पूरी तरह सुरक्षित है।



