पूरे महीने रोजा रखने के बाद जब रमजान का महीना खत्म होने पर आता है, तब लोग ईद-उल-फितर का इंतजार बेसब्री से करते हैं। ईद मुस्लिम समुदाय का सबसे बड़ा त्योहार है। ईद आने से पहले बाजारों में काफी रौनक बढ़ जाती है, घरों में पकवान बनने लगते हैं और बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी के चेहरे पर खुशियां देखने को मिलती है। इसे मीठी ईद के नाम से भी जाना जाता है।
कब मनाई जाएगी ईद?
ईद का त्योहार चांद दिखने पर ही तय होता है और हर बार की तरह इस बार भी लोग ईद की तारीख को लेकर काफी कन्फ्यूज हैं। माना जा रहा है कि इस साल ईद 20 या 21 मार्च 2026 को मनाई जा सकती है। अगर रमजान के 29वें रोजे की शाम चांद दिखाई दे जाता है तो अगले दिन ईद होगी, लेकिन अगर चांद नहीं दिखता तो रमजान 30 दिन पूरा करेगा और उसके बाद ईद मनाई जाएगी।
ईद अलग-अलग देशों में अलग दिन
ये तो सभी जानते हैं कि चांद हर जगह एक ही समय पर नहीं दिखाई दे सकता, इसलिए अलग-अलग देशों में ईद अलग-अलग दिन मनाई जाती है। खाड़ी देशों जैसे सऊदी अरब और यूएई में आमतौर पर चांद पहले नजर आता है, इसलिए वहां 20 मार्च को ईद होने की संभावना जताई जा रही है। वहीं भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में चांद अक्सर एक दिन बाद दिखाई देता है, इसलिए यहां 21 मार्च को ईद मनाए जाने की संभावना ज्यादा है।
जकात-उल-फितर देना क्यों जरूरी होता है?
ईद-उल-फितर को “रोजा खोलने का त्योहार” भी कहा जाता है। इस दिन लोग सुबह जल्दी उठते हैं, नहाकर नए कपड़े पहनते हैं और मस्जिद या ईदगाह में जाकर ईद की नमाज अदा करते हैं। नमाज के बाद लोग एक-दूसरे को गले लगाकर “ईद मुबारक” कहते हैं। ईद की असली भावना सिर्फ जश्न मनाने में नहीं, बल्कि खुशियां बांटने में भी होती है। इसलिए ईद की नमाज से पहले जकात-उल-फितर देना जरूरी माना जाता है, ताकि गरीब और जरूरतमंद लोग भी इस त्योहार की खुशी का हिस्सा बन सकें।



