चैत्र लगते ही हम सबका मन राममय हो उठता है। चैत्र नवमी को राम जन्मेंगे। घर-घर सोहर बधाई गूंज उठेगी, मन फिर राममय हो जाएगा। चैत का महीना नववर्ष का आगमन है। चैत आता है सबको चेताने कि उठो, जो पीछे छूट गया उसे तज आगे की सुध लो।
प्रभु राम ने जन्म के लिए चैत का महीना ही चुना, क्योंकि राम भारत की चेतना हैं। राम का आगमन लोकमानस में आशा, उत्साह, ऊर्जा का संचार है! प्रति वर्ष रामनवमी में यही उल्लास छलकता है।
जन्मे हैं राम रघुरइया हो रामा चैत ही मासे
पिता दशरथ माता कौशल्या
भरत लखन शत्रु भाई हो रामा चैत ही मासे
राम जी के भइले जनमवा चला हो करि आई दरसनवा
रानी कौशल्या पलना झुलावें
बरसत फूल अंगनवा चला हो करि आई दरसनवा
सुनते हुए पूरा स्टूडियो तालियों से गूंज उठा। सभी राममय हो गए। गीत के समापन पर अनु कपूर जी कुछ कहते उससे पहले वहां निर्णायक की कुर्सी पर बैठे पाकिस्तान के गायक राहत फतेह अली खान जी खड़े होकर बोले, ‘मालिनी जी, आपने हमें अयोध्या घुमा दिया, राम के दर्शन करा दिए।’ उनके मुख से यह सुन सभी गदगद हो उठे। प्रभु राम की ऐसी व्याप्ति देख श्रद्धापूर्वक मैने शीश झुका लिया।
रामकृपा से गायिका होने के कारण ऐसे अनेक अद्भुत अनुभव हुए हैं। कुछ बरस पहले दिल्ली में जश्न-ए-रेख्ता का मंच और युवाओं का जन सैलाब। अवध बिहारी भगवान राम के जन्म की बधाई आरंभ होते ही युवाओं ने ऐसी ताल में ताल मिलाई, जैसे अयोध्या के कनक भवन में रामभक्त भाव विभोर हो नृत्य कर रहे हों। यह राम की कैसी शक्ति है, जो सबको प्राण संजीवनी प्रदान करती है। श्रीराम भारत के आत्मा में कैसे बसे हैं, इस भाव को सात समंदर पार बैठा विदेशी भी यदि ग्रहण कर सकता है तो यह राम की पुण्याभा का ही आशीर्वाद है।
तीन बरस पहले स्पेन के प्राचीन शहर वेलेंशिया में मेरा कार्यक्रम हुआ, श्रोताओं में सिर्फ स्पेनिश मूल के लोग थे। संस्कृति केंद्र द्वारा मुझे महिला दुभाषिया दी गई, जिससे कि मैं जो कुछ भी गा रही हूं, उसे स्पेनिश भाषा में वह भाव श्रोताओं तक संप्रेषित कर सके। देवी गीत से कार्यक्रम का आरंभ करने के बाद मैंने अगले गीत से पूर्व घोषणा की, कि अब मैं प्रभु राम के जन्म का बधाई गीत सुनाने जा रही हूं।
इस पारंपरिक गीत का महत्व इसलिए है कि अयोध्या में राम को जन्मे युग बीत गए, किंतु हमारे यहां किसान के घर लाल का जन्म हो या राजा के घर, माना यही जाता है कि राम पधारे हैं। सभी की आस है कि उनकी संतान राम जैसी करुणावान, दयावान, क्षमाशील व आज्ञाकारी बने। महिला दुभाषिया ने इसे स्पेनिश भाषा में श्रोताओं को कहा और दर्शकों ने जोर से तालियां बजानी शुरू कर दीं। मैं चकित! मैंने महिला से पूछा कि तालियां क्यों बजने लगीं, अभी तो मैंने गाना शुरू नहीं किया? उसने मेरी यह जिज्ञासा भी स्पेनिश भाषा में दर्शकों से कही। उधर से जो उत्तर आया, उसने मेरे रोम रोम को हिला दिया। उनका उत्तर था, ‘धन्य भारत देश। धन्य है भारत की संस्कृति और धन्य हैं प्रभु राम! कैसे रहे होंगे वो जो आज भी आपके यहां नवागत शिशु का मंगल राम का बधाई गीत गाकर मनाया जाता है!’
राम जीना सिखाते हैं.. संबंधों की मर्यादा रखना और उन्हें उनके उत्कर्ष तक ले जाना सिखाते हैं। पिता के प्रति संतान का समर्पण और भाई के साथ संबंधों को निभाना राम से ही सीखा जा सकता है। मैत्री को उसकी अपेक्षित आभा भी वही देते हैं और यह सब करते हुए शत्रु को दंडित भी करते चलते हैं। फिर वो समुद्र हो या रावण। हर बार रामनवमी आती है मनुष्यता पर अखंड विश्वास की तरह!
राम असाधारण होते हुए इतने साधारण हैं कि हर रामनवमी हमें लगता है कि हमने प्रभु को थोड़ा पा लिया है। आज जन जन को हृदयवान मानवीय राम की आवश्यकता है। रामचरित और रामकथा की व्याप्ति अनंत काल तक सनातन पथप्रदर्शक के रूप विराजमान रहेगी!



