वैदिक पंचांग के अनुसार, आज यानी 26 मार्च को चैत्र नवरात्र का आठवां दिन है। आठवें दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही मां महागौरी की कृपा प्राप्त करने के लिए व्रत भी किया जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां महागौरी की साधना करने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। साथ ही पापों से मुक्ति और मनचाहा जीवनसाथी मिलता है। मां महागौरी की पूजा के दौरान व्रत कथा का पाठ जरूर करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि कथा का पाठ करने से सुख-सुविधाओं में वृद्धि होती है और मां महागौरी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। आइए पढ़ते हैं मां महागौरी की कथा।
मां महागौरी की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, मां पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाना चाहती थीं। इसके लिए उन्होंने कठोर तपस्या की। तपस्या के समय उन्होंने अन्न-जल का त्याग किया, जिसकी वजह से मां पार्वती का शरीर कला पड़ गया। इसके बाद भगवान शिव मां पार्वती की तपस्या से प्रसन्न हुए और उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया। महादेव ने मां पार्वती को गंगाजल से पवित्र किया, जिसके बाद देवी का शरीर कांतिमय हुआ।
महागौरी के मंत्र
1- श्वेते वृषे समरूढा श्वेताम्बराधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा।।
2- या देवी सर्वभूतेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
महागौरी का स्तोत्र पाठ
सर्वसंकट हंत्री त्वंहि धन ऐश्वर्य प्रदायनीम्।
ज्ञानदा चतुर्वेदमयी महागौरी प्रणमाभ्यहम्॥
सुख शान्तिदात्री धन धान्य प्रदीयनीम्।
डमरूवाद्य प्रिया अद्या महागौरी प्रणमाभ्यहम्॥
त्रैलोक्यमंगल त्वंहि तापत्रय हारिणीम्।
वददं चैतन्यमयी महागौरी प्रणमाम्यहम्॥


