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गरियाबंद रामनवमी पर भक्ति में डूबा: मंदिरों में उमड़ी भीड़, जयकारों से गूंजा शहर, महाआरती-भंडारों में हजारों श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद

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राधेश्याम सोनवानी गरियाबंद :  चैत्र नवरात्र के अंतिम दिन शुक्रवार को रामनवमी का पावन पर्व पूरे नगर में श्रद्धा, उत्साह और भक्ति के अद्भुत संगम के साथ मनाया गया। सुबह होते ही देवी मंदिरों के कपाट खुलते ही भक्तों की लंबी कतारें लग गईं और दिनभर दर्शन-पूजन का सिलसिला चलता रहा। नगर के हर प्रमुख मंदिर में श्रीरामनवमी का उत्सव धूमधाम से आयोजित किया गया, जहां हवन-पूजन, कन्या भोज और भंडारे के माध्यम से श्रद्धालुओं ने आस्था का परिचय दिया।

मंदिर परिसरों में “जय माता दी” और “जय श्रीराम” के गगनभेदी जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालु पूरे दिन पूजा-अर्चना में लीन नजर आए, वहीं शाम होते-होते मंदिरों में भीड़ और अधिक बढ़ गई। प्रसाद ग्रहण करने के लिए लोगों की लंबी कतारें लगी रहीं और हर कोई इस पुण्य अवसर का हिस्सा बनने को उत्सुक दिखा।

रामनवमी के इस विशेष अवसर पर नगर के प्रसिद्ध शिव दुर्गा मंदिर में गरियाबंद मित्र मंडली समितियों द्वारा भव्य महाआरती और विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। महाआरती के दौरान सैकड़ों दीपों की रोशनी और भक्ति गीतों ने माहौल को और भी दिव्य बना दिया। इसके पश्चात प्रसाद वितरण शुरू हुआ, जिसमें करीब एक हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की।

भंडारे को सफल बनाने में पुरुषों के साथ महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई। आयोजन समिति के अध्यक्ष अतुल गुप्ता ने बताया कि पिछले तीन वर्षों से उनकी मित्र मंडली द्वारा शिव मंदिर प्रांगण में यह आयोजन निरंतर किया जा रहा है। इस वर्ष भी 1500 से अधिक श्रद्धालुओं ने हलवा, पूरी, चावल और सब्जी का प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ लिया।

भंडारे की सबसे खास बात यह रही कि पूरी समिति एक परिवार की तरह जुटी नजर आई। यहां किसी ने केवल जिम्मेदारी नहीं निभाई, बल्कि हर सदस्य ने सेवा को अपना कर्तव्य मानकर पूरे मन से काम किया। महिला, पुरुष और बच्चे—सभी ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और सुबह से लेकर देर शाम तक सेवा का यह सिलसिला निरंतर चलता रहा।रसोई से लेकर वितरण तक हर व्यवस्था समिति के लोगों ने स्वयं संभाली। कहीं महिलाएं पूरे उत्साह के साथ पूड़ी बेलती नजर आईं, तो पुरुष प्रसाद तैयार करने और परोसने में जुटे रहे। वहीं छोटे-छोटे बच्चे भी पीछे नहीं रहे—कोई पानी पिलाता दिखा, तो कोई पत्तल बिछाकर आने वाले श्रद्धालुओं का स्वागत करता नजर आया।

पूरे दिन मंदिर परिसर में सेवा, समर्पण और अपनत्व का ऐसा भाव देखने को मिला, मानो यह आयोजन नहीं बल्कि एक बड़ा पारिवारिक उत्सव हो। हर चेहरे पर संतोष और श्रद्धा झलक रही थी, जिसने भंडारे को सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक

एकता और सहयोग की मिसाल बना दिया।
ऋषिकांत मोहरे (आयोजन समिति):
“रामनवमी का यह पावन पर्व हम सभी के लिए सेवा और भक्ति का अवसर होता है। पिछले तीन वर्षों से हमारी मित्र मंडली शिव दुर्गा मंदिर में भंडारे का आयोजन कर रही है, जिसमें हर साल श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है। इस बार भी करीब 1500 लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया, यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है।”

वर्षा तिवारी (श्रद्धालु/सहभागी):
“रामनवमी पर मंदिरों में जो भक्ति और उत्साह का माहौल रहता है, वह अद्भुत होता है। भंडारे और कन्या भोज जैसे आयोजन से लोगों में सेवा भावना बढ़ती है। ऐसे आयोजन समाज को जोड़ने का काम करते हैं और हमें अपनी संस्कृति से जुड़े रहने की प्रेरणा देते हैं।”

शालू मोहरे (सहभागी/आयोजन सहयोगी):
“रामनवमी जैसे पावन पर्व पर भंडारे में सेवा करने का अलग ही आनंद होता है। हमने पूरे मन से श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद तैयार और वितरित किया। जब लोग प्रसाद ग्रहण कर संतोष और खुशी जताते हैं, तो हमारी मेहनत सफल हो जाती है। ऐसे आयोजन समाज में एकता और भक्ति की भावना को और मजबूत करते हैं।”

पूरे नगर में दिनभर भक्ति, सेवा और उत्साह का माहौल बना रहा। रामनवमी के इस पर्व ने एक बार फिर गरियाबंद की धार्मिक एकता और सामूहिक आस्था की झलक प्रस्तुत की, जहां हर गली-मोहल्ला श्रद्धा और उल्लास से सराबोर नजर आया।

इस अवसर पर ये रहे उपस्थित अतुल गुप्ता, ऋषिकांत मोहरे, सुमित पारख, आशीष तिवारी, सीनू ठाकुर, जीतू सेन, सुब्रत पात्र, पित्तू देवांगन, भरत दीवान, तरुण ठाकुर, ललित साहू, नरेन्द्र पांडे, क्षितिज गुप्ता संजय कश्यप, निरंजन प्रधान, बाबू भोषले, वैभव ठक्कर, शत्रुघ्न साहू, सूरज सिन्हा सत्य प्रकाश मानिकपुरी,दीनू निर्मलकर पुजारी खड़ानन्द प्रसाद दुबे,,वर्षा तिवारी, साधना सेन, सोनी साहू, शालू मोहरे, मनीषा गुप्ता, दिव्या देवांगन, पूनम पारख, विभा कश्यप, संगीता साहू,प्राची कुटारे,अनिता शांडिल्य गुरनूर कुजरेजा मृणाली सोनवानी

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