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ईरान ने शांति वार्ता में पाकिस्तान की मध्यस्थता को ठुकराया, ट्रंप ने दी तबाही की चेतावनी

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नई दिल्ली: एक ओर पाकिस्तान पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच खुद को संभावित मध्यस्थ के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, वहीं ईरान ने इस्लामाबाद की ऐसी किसी पहल से साफ दूरी बना ली है।

मुंबई स्थित ईरान के महावाणिज्य दूतावास ने सोमवार को स्पष्ट किया कि अमेरिका के साथ उसकी कोई प्रत्यक्ष वार्ता नहीं हुई है और पाकिस्तान द्वारा आयोजित किसी भी मंच में ईरान ने भाग नहीं लिया। इसके साथ ही पाकिस्तान की तटस्थता पर भी सवाल उठने लगे हैं।

एनपीटी से बाहर निकलने पर विचार कर रहा ईरानइसी बीच ईरान ने परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) से बाहर निकलने की संभावना पर विचार शुरू कर दिया है और इस विषय पर वहां की संसद में चर्चा चल रही है। इसे ईरान के परमाणु नीति में संभावित बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान को जल्द समझौता करने की चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो ईरान के खार्ग द्वीप, ऊर्जा ढांचे और जलशोधन संयंत्रों समेत सबकुछ तबाह कर दिया जाएगा।

पश्चिम एशिया में सैन्य टकराव हुआ तेजइसी बीच पश्चिम एशिया में सैन्य टकराव सोमवार को और तेज हो गया। इजरायल के हाइफा स्थित महत्वपूर्ण तेल रिफाइनरी परिसर में रॉकेट हमले के बाद आग लग गई। इजरायल ने कहा कि यह हमला हिजबुल्ला की ओर से किया गया। दूसरी ओर ईरान के कई महत्वपूर्ण सैन्य और औद्योगिक प्रतिष्ठानों पर अमेरिकी-इजरायली हमले जारी रहे।

ईरान ने रिवोल्यूशनरी गार्ड नौसेना के कमांडर अलीरेजा तंगसीरी के इजरायली हमले में मारे जाने की पुष्टि कर दी। रॉयटर्स के अनुसार, ईरानी वाणिज्य दूतावास ने बयान जारी कर कहा कि अमेरिका की ओर से केवल मध्यस्थों के जरिए अतार्किक और अव्यावहारिक मांगें भेजी गई हैं।

अमेरिका से कोई सीधी बातचीत नहीं हुई- ईरानबयान में कहा गया, ”अमेरिका से कोई सीधी बातचीत नहीं हुई। केवल मध्यस्थों के जरिए अत्यधिक और असंगत मांगें आई हैं। पाकिस्तान के मंच उसका अपना मामला हैं, हम उसमें शामिल नहीं थे। क्षेत्रीय स्तर पर युद्ध समाप्त करने की अपीलों का स्वागत है, लेकिन यह भी याद रखा जाना चाहिए कि संघर्ष किसने शुरू किया।”

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघेई ने भी इसी स्वर में कहा कि ईरान की स्थिति बिल्कुल स्पष्ट है। उनके अनुसार, देश पर सैन्य आक्रमण हुआ है और फिलहाल पूरा ध्यान आत्मरक्षा पर केंद्रित है।

यह प्रतिक्रिया पाकिस्तान के उस दावे के तुरंत बाद आई जिसमें विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा था कि पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच प्रत्यक्ष वार्ता कराने के लिए तैयार है। डार, जो उपप्रधानमंत्री भी हैं, ने रविवार को इस्लामाबाद में सऊदी अरब, मिस्त्र और तुर्किये के विदेश मंत्रियों के साथ कई घंटे तक बैठक की थी। हालांकि एक पाकिस्तानी सूत्र ने संकेत दिया कि अमेरिका और ईरान के बीच इस सप्ताह प्रत्यक्ष बातचीत की संभावना कम है।

ट्रंप की चेतावनी से जमीनी कार्रवाई के संकेतन्यूयार्क टाइम्स के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान से जल्द से जल्द समझौते की शर्तें स्वीकार करने को कहा है। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि अमेरिकी सेना खार्ग द्वीप पर तुरंत कब्जा कर सकती है। इस टिप्पणी के बाद ईरान के खिलाफ संभावित जमीनी सैन्य कार्रवाई की आशंकाएं तेज हो गई हैं, खासकर तब जब अमेरिका पहले से पश्चिम एशिया में भारी सैन्य जमावड़ा कर चुका है।

ट्रंप ने कहा कि यदि जल्दी समझौता नहीं हुआ तो ईरान को पूरी तरह तबाह कर दिया जाएगा। उनके अनुसार बिजली संयंत्र, तेल कुएं, खार्ग द्वीप और संभवत: जलशोधन संयंत्र भी अमेरिकी निशाने पर आ सकते हैं।

परमाणु अप्रसार संधि से बाहर निकलने पर विचारएपी के अनुसार, ईरान के सांसद अलादीन बोरुजेर्दी ने कहा कि संसद में एनपीटी से बाहर निकलने की संभावनाओं की समीक्षा की जा रही है। यह संधि देशों को परमाणु ऊर्जा के विकास, अनुसंधान, उत्पादन और उपयोग का अधिकार देती है, बशर्ते वे परमाणु हथियार हासिल करने की दिशा में आगे न बढ़ें। ट्रंप लगातार कहते रहे हैं कि ईरान को परमाणु हथियार संपन्न देश नहीं बनने दिया जाएगा, जबकि ईरान इस आरोप से इनकार करता रहा है।

बोरूजेर्दी ने एक साक्षात्कार में कहा, ”हम इन प्रतिबंधों को क्यों स्वीकार करें? हम वैसे भी परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश नहीं कर रहे हैं। लेकिन ऐसा भी नहीं हो सकता कि नियमों का पालन केवल हम करें और दूसरी तरफ वे हम पर बम बरसाते रहें।”

आईएएनएस के अनुसार, ईरान के परमाणु केंद्रों पर लगातार हमले हो रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आइएईए) ने भी इसकी पुष्टि की है। एजेंसी ने उपग्रह चित्रों के आधार पर बताया कि हमले में ईरान के खोंदाब स्थित भारी जल उत्पादन संयंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचा है और वह फिलहाल संचालन की स्थिति में नहीं है। हालांकि रेडिएशन का तत्काल खतरा नहीं बताया गया।

इसके अलावा ईरान के खुजेस्तान स्थित स्टील उत्पादन केंद्र पर हमले के बाद रेडियोधर्मी पदार्थों के रिसाव का खतरा बढ़ गया है। यहां कोबाल्ट-60 और सीसियम-137 जैसे रेडियोधर्मी स्त्रोतों का उपयोग औद्योगिक प्रक्रियाओं में किया जाता था।

हाइफा रिफाइनरी में आग, क्षेत्र में मिसाइल हमले तेजइजरायल के अग्निशमन विभाग ने बताया कि उत्तरी शहर हाइफा में नौसेना अड्डे के पास मिसाइल के मलबे से तेल रिफाइनरी परिसर स्थित तेल डिपो में आग लग गई। एक फैक्ट्री को भी नुकसान पहुंचा है। इजरायल के ऊर्जा मंत्री एली कोहेन ने कहा कि मुख्य उत्पादन केंद्र सुरक्षित है और तेल आपूर्ति जारी है। बीर शेवा स्थित सैन्य बेस के करीब एक मिसाइल गिरने से 11 लोगों के घायल होने की खबर है।

हिजबुल्ला ने हमले की जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि उसका निशाना नौसैनिक अड्डा था। इसी दौरान सऊदी अरब ने पांच मिसाइलें इंटरसेप्ट कीं, जबकि दुबई में हमले के बाद धुएं का बड़ा गुबार उठता देखा गया। संयुक्त अरब अमीरात ने भी एक मिसाइल हमले को विफल करने का दावा किया।सोमवार को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के सैन्य ढांचे पर हमले जारी रखे।

ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार तबरीज स्थित पेट्रोकेमिकल संयंत्र को नुकसान पहुंचा। वहीं लेबनान में इजरायली हमले में एक शांति सैनिक की मौत की भी सूचना है। बहरीन के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास एक तटीय गांव अल दैर में एक वाणिज्यिक इमारत में हमले में आग लग गई।

भारत आ रहे ईरानी राहत विमान को हमले में नुकसानईरान के मशहद अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर अमेरिकी हवाई हमले में माहान एयर का एक विमान क्षतिग्रस्त हो गया। बताया गया कि ये विमान मानवीय सहायता मिशन पर था। एएनआई के अनुसार, यह विमान नई दिल्ली आकर युद्ध प्रभावित लोगों के लिए दवाइयों और राहत सामग्री की खेप लेने वाला था। बताया गया कि विमान को 11 टन से अधिक चिकित्सीय सहायता सामग्री लेकर वापस ईरान लौटना था।

कुवैत में भारतीय की मौत, अब तक आठ मारे गएकुवैत के बिजली और जल शोधन संयंत्र पर ईरान के हमले में एक और भारतीय की मौत हो गई। इसके साथ ही खाड़ी देशों में अब तक आठ भारतीयों की मौत हो चुकी है। पीटीआई के अनुसार, कुवैत के बिजली एवं जल मंत्रालय ने कहा कि हमले की वजह से सर्विस बिल्डिंग को नुकसान पहुंचा।

मंत्रालय ने इस हमले की कड़ी निंदा की। मंत्रालय ने एक्स पर लिखा कि इस हमले में भारतीय मूल के हमारे कर्मचारी की मौत हो गई। कुवैत स्थित भारतीय दूतावास ने भी इसकी पुष्टि की है। दूतावास ने कहा कि कुवैत के अधिकारियों के साथ मिलकर वह हर संभव सहायता और समर्थन उपलब्ध करा रही है।

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