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शहर की सबसे पुरानी सड़क सदर रोड अपनी बदहाली पर बहा रहा हैं आंसू

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अमन पथ न्यूज़ बालोद से उत्तम साहू :  बालोद नगर की सबसे पुरानी व बालोद को पहचान देने वाली सड़क सदर रोड अपने अस्तित्व को लेकर जूझ रहा है। सड़क को कब्जा से मुक्त करने प्रशासन के ऊपर बहुत उम्मीद है। बीते कुछ दिनों से इसे लेकर शहर में जहां चर्चा बनी हुई है वही मीडिया में भी लोग अपनी बात रख रहे हैं। शहर के सिर्फ 2% लोगों के दबाव में आकर सही करवाई नहीं करना यह 98% लोगों की इच्छा को दबाने जैसा है। प्रशासन का ध्यान खींचने यह सड़क अपनी व्यथा बता रही है।

अपने अस्तित्व के लिए जूझ रहे सदर रोड का कलेक्टर के नाम से यह खुला पत्र है। सदर रोड कह रहा है, कलेक्टर जी मुझे मेरा स्वरूप लौटा दो। 25 _ 30 सालों से मैं अपने मूल स्वरूप में आने को तरस रही हूं। मेरे अंग अंग लोगों ने कब्जा कर लिए हैं। मैं दर्द से कराह रही हूं। मेरी पीड़ा यह है कि मैं शहर की सबसे पुरानी सड़क हूं, शहर को एक अलग पहचान दी है, मेरे नाम को जिले भर के लोग जानते हैं, मैंने जीवकोपार्जन के लिए सैकड़ो लोगों को पनाह दी है, मेरे बाद शहर में बनी सड़कें आज अतिक्रमण से मुक्त हो गई हैं, लेकिन मैं लगातार लोगों के आतताई का शिकार हो रही हूं। जब मैं अस्तित्व में आई तब मुझ में से होकर दो_दो बसें एक साथ आती जाती थी। लोगों का मेरे किनारे बैठकर बसों का इंतजार करना मुझे बहुत अच्छा लगता था। अब हालत यह है कि बसें तो छोड़िए दो कार भी एक साथ मुझसे होकर नहीं गुजर सकती। कलेक्टर जी मैं अपने मूल स्वरूप को पाने काफी समय से संघर्ष कर रही हूं। जिला बनने से पहले ही मैं अतिक्रमण का शिकार होती रही हूं, लेकिन जिला बनने के बाद तो जैसे मेरी कोई कीमत ही नहीं रह गई है। लोग जहां पाए वहां मुझे दबा दिए। जिला बनने के इंतजार में मैंने अपने आप को ढांढस बंधाया।जिला बनने के बाद मुझे उम्मीद थी कि मेरा स्वरूप मुझे वापस मिल जाएगा, लेकिन मेरी उम्मीद आज भी धरी की धरी रह गई है।

क्या-क्या नहीं दिया मैंने शहर को
कलेक्टर जी अस्तित्व में आते ही शहर को मैंने क्या-क्या नहीं दिया। मेरे किनारे छोटी सी झोपड़ी में व्यवसाय करने वाले लोगों को आज बहु मंजिला इमारत बनाने में मदद की। जिले भर के लोगों को शहर पहुंचने में मैंने सुविधा दी। छोटे-छोटे व्यवसाईयों को बड़े-बड़े व्यापारी बनते देखा। मेरी सुंदरता के चलते ही यहां व्यवसाय खूब फला फूला और सबके परिवार को आगे बढ़ाने में मैने मदद की। मेरे किनारो की दुकानें सिर्फ मेरी पहचान की बदौलत ही आज तरक्की की शिखर चढ़ रही है। मेरी ही बदौलत व्यावसायी अपने बच्चों को डॉक्टर, इंजीनियर, सीए, बड़े-बड़े राजनीतिज्ञ तथा बड़े बड़े व्यापारी बनाएं, फिर मेरी दुर्दशा पर किसी को तरस क्यों नहीं आ रहा।

पहले तो हिस्से ही दबाए अब तो अंग काटने की तैयारी

कलेक्टर जी पहले तो लोगों ने मेरे दोनों तरफ के हिस्से कब्जा किए, मुझपर बेतरतीब समान फैला दिए गए, यहां तक तो मैं शांत रही और किसी तरह पीड़ा सहती रही, लेकिन अब तो दोनों तरफ दो-दो मीटर की सड़क बनाने की बात कह कर दोनों तरफ के मेरे आधे अंगों को ही मुझसे अलग कर देने की योजना बन रही है, यह पीड़ा मैं नहीं झेल सकती, आपसे निवेदन मुझे किसी भी तरह इनसे मुक्ति दिलाकर मुझे मेरे स्वरूप वापस दिला दीजिए।

हर बार उम्मीद हो गई धूमिल
कलेक्टर जी जब-जब शहर को सुंदर बनाने अभियान चला मैने भी प्रशासन की ओर उम्मीद भरी नजर से देखा, लेकिन हर बार मेरे मुहाने आकर यह अभियान थम गया। आज एक बार फिर शहर भर में यह अभियान चला है, इस बार मुझे मेरी सुंदरता वापस मिल जाने की उम्मीद है, मैं भरोसा करता हूं कि प्रशासन मुझे मेरी सुंदरता लौटा देगा।

सोशल मीडिया में छाया एक पोस्ट

सदर बाजार को कब्जा मुक्त करने के मामले को लेकर इन दिनों शहर में सोशल मीडिया में भी एक पोस्ट छाया हुआ है। अधिकतर ग्रुपों में इसे पोस्ट कर सदर बाजार को कब्जे से मुक्त करने की अपील लोगों से की जा रही है। इस पोस्ट को लोग हाथों हाथ ले रहे हैं। जिस तेजी के साथ यह वायरल हो रहा है इससे ऐसा लग रहा है कि शहर के लोग सदर बाजार को कब्जामुक्त कराने ठान लिए हैं। इस पोस्ट में सभी लोगों से मिलकर आवाज उठाने की बात कही गई है। पोस्ट को बहुत ही खूबसूरती के साथ बनाया गया है। एक तरफ अतिक्रमण को दिखाया गया है तो दूसरे तरफ अतिक्रमण मुक्त होने पर सदर रोड कितना सुंदर दिखेगा इसे भी दिखाया गया है।

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