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महिला आरक्षण विधेयक को अटकाना,लटकाना, भटकाना ही भाजपा का उद्देश्य। महिलाओं के साथ राजनीतिक छल कर रही भाजपा: सुखचंद बेसरा

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राधेश्याम सोनवानी,गरियाबंद :- महिला आरक्षण विधेयक को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस के जिलाध्यक्ष सुखचंद बेसरा ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि भाजपा देश की महिलाओं के साथ बड़ा राजनीतिक छल कर रही है।बेसरा ने कहा कि मोदी सरकार का एकमात्र उद्देश्य इस महत्वपूर्ण मुद्दे को अटकाना, लटकाना और भटकाना है। उन्होंने कहा कि भाजपा की नीयत कभी भी महिलाओं को अधिकार देने की नहीं रही है, बल्कि वह अटकाना, लटकाना और भटकाना की नीति पर काम कर रही है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने विधेयक को लागू करने की समयसीमा पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा कि जब 2023 में इस प्रस्ताव को लाया गया था, तो उसी प्रारूप को तत्काल प्रभाव से लागू करने में सरकार को क्या परेशानी है? उन्होंने कहा कि साल 2029 में आरक्षण लागू करने की बात कहना और परिसीमन की आड़ लेकर प्रारूप में संशोधन करना पूरी तरह से बेमानी है। यह केवल समय बिताने और महिलाओं को भ्रमित करने की एक सोची-समझी रणनीति है।

सुखचंद बेसरा ने भाजपा की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि सदन में 131 संविधान संशोधन विधेयक को पारित होने के लिए एक तिहाई बहुमत न होने के बावजूद एक आधे-अधूरे विधेयक को राजनीतिक लाभ के उद्देश्य से संसद के पटल पर रखना महिलाओं के हितों पर कुठाराघात है। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने जानबूझकर ऐसा प्रारूप तैयार किया जो संवैधानिक और तकनीकी रूप से परिपक्व नहीं था, जिसके कारण यह विधेयक सदन में गिर गया। कांग्रेस जिलाध्यक्ष श्री बेसरा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने हमेशा महिला सशक्तिकरण की वकालत की है और पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी ने ही पंचायतों और स्थानीय निकायों में महिलाओं को आरक्षण देकर इसकी नींव रखी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि आज भाजपा जिस विधेयक का ढिंढोरा पीट रही है, उसमें परिसीमन और जनगणना जैसी जटिल शर्तें जोड़कर उसे अनिश्चितकाल के लिए ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।

मोदी सरकार का उद्देश्य महिलाओं को अधिकार न देकर सिर्फ सुर्खियां बटोरना है। अगर सरकार की नीयत साफ होती, तो इस विधेयक को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाता, न कि जनगणना और परिसीमन के नाम पर तक टाला जाता। कांग्रेस जिलाध्यक्ष बेसरा का कहना है कि जब तक जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक यह आरक्षण केवल कागजों पर रहेगा। यह महिलाओं को लंबी प्रतीक्षा में झोंकने की साजिश है। उन्होंने मांग की कि महिला आरक्षण के भीतर अन्य पिछड़ा वर्ग की महिलाओं के लिए अलग से कोटा सुनिश्चित किया जाना चाहिए, जिसे भाजपा सरकार ने पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है। बेसरा ने तंज कसते हुए कहा कि जब भी कोई चुनाव करीब आते हैं, भाजपा ऐसे जुमले लेकर आती है ताकि जनता का ध्यान असल मुद्दों जैसे महंगाई और बेरोजगारी से भटकाया जा सके। सुखचंद बेसरा ने कहा कि मोदी सरकार की कार्यशैली में पारदर्शिता का अभाव है। उन्होंने कहा कि बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा देने वाली भाजपा आज महिलाओं को उनके वास्तविक राजनीतिक अधिकारों से वंचित रख रही है। कांग्रेस पार्टी इस राजनीतिक छल को जनता के बीच ले जाएगी।

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