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‘वो अपने वादे से पलटे, भरोसा नहीं कर सकते’, ईरान ने पाकिस्तान पर लगाया अमेरिका के प्रति पक्षपात का आरोप

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नई दिल्ली : अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की कोशिशों के बीच पाकिस्तान की भूमिका पर अब सवाल खड़े होने लगे हैं। रविवार को एक ईरानी सांसद ने इस्लामाबाद की मध्यस्थता की क्षमता पर गंभीर आपत्ति जताते हुए उसे पक्षपाती बताया।

ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति आयोग के प्रवक्ता और दश्तेस्तान से सांसद इब्राहिम रजाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि, एक मध्यस्थ को पूरी तरह निष्पक्ष होना चाहिए, लेकिन पाकिस्तान इस कसौटी पर खरा नहीं उतरता। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान हमेशा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के हितों को ध्यान में रखता है और अमेरिका के खिलाफ खुलकर नहीं बोलता।

इस्लामाबाद हमेशा ट्रंप के हितों का रखता है ध्यानरजाई ने कहा कि पाकिस्तान भले ही ईरान का अच्छा पड़ोसी और दोस्त हो, लेकिन बातचीत के लिए वह भरोसेमंद मध्यस्थ नहीं है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिका ने पहले पाकिस्तान के जरिए दिए गए प्रस्ताव को स्वीकार किया था, लेकिन बाद में अपने वादे से पीछे हट गया, जिसकी जानकारी पाकिस्तान ने दुनिया के सामने नहीं रखी।

उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका ने लेबनान और जब्त की गई संपत्तियों को लेकर भी कई वादे किए थे, लेकिन उन्हें पूरा नहीं किया। ऐसे में एक निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका निभाने के बजाय पाकिस्तान एक पक्ष की तरफ झुका हुआ नजर आता है।

बातचीत जारी रखने की कोशिशें जारीइस बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने हाल ही में पाकिस्तान का दौरा किया, जहां उन्होंने सेना प्रमुख आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ समेत कई वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की।

इससे पहले अराघची ओमान भी गए थे, जहां उन्होंने सुल्तान हैथम बिन तारिक अल-सईद के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और कूटनीतिक मुद्दों पर चर्चा की थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन चर्चाओं में सिर्फ परमाणु मुद्दा ही नहीं, बल्कि समुद्री मार्गों के लिए नए कानूनी ढांचे, सुरक्षा गारंटी, मुआवजे और अमेरिका द्वारा लगाए गए समुद्री प्रतिबंधों को हटाने जैसे मुद्दे भी शामिल हैं। इस्लामाबाद दौरे के बाद अब अराघची रूस पहुंच चुके हैं।

वहीं, बातचीत की रफ्तार धीमी पड़ने के बीच डोनल्ड ट्रंप ने कहा है कि, अगर ईरान बातचीत करना चाहता है, तो उसे खुद आगे आना होगा। यह बयान ऐसे समय में आया है, जब अमेरिका ने पाकिस्तान में प्रस्तावित वार्ता को रद कर दिया है।

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