जर्नी ऑफ सैनिटेशन हाइजीन बना राज्य स्तरीय नवाचार, स्वच्छता के साथ युवाओं को मिला रोजगार का नया अवसर

सुरेश मिनोचा एमसीबी: मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले की अभिनव पहल “जर्नी ऑफ सैनिटेशन हाइजीन (JOSH) अब पूरे छत्तीसगढ़ के लिए स्वच्छता और स्वरोजगार का मॉडल बन गई है। राज्य स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की अपेक्स समिति की बैठक में जिले के इस नवाचार की सराहना करते हुए मुख्य सचिव द्वारा प्रदेश के समस्त जिलों में इसके प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए गए हैं।यह एमसीबी जिले के लिए गौरव का विषय है कि स्थानीय स्तर पर शुरू की गई यह पहल अब राज्यव्यापी अभियान का स्वरूप लेने जा रही है।
खड़गवां से हुई थी शुरुआत, अब पूरे प्रदेश में विस्तार
विदित हो कि 5 जनवरी 2026 को खड़गवां से जिले के प्रभारी मंत्री रामविचार नेताम एवं स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल द्वारा “जर्नी ऑफ सैनिटेशन हाइजीन (JOSH )” का शुभारंभ किया गया था। कलेक्टर डी. राहुल वेंकट के मार्गदर्शन में जिले के तीनों जनपद पंचायतों में संस्थागत, व्यावसायिक एवं व्यक्तिगत शौचालयों की नियमित साफ-सफाई, उपयोग बढ़ाने तथा युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से इसकी रूपरेखा तैयार की गई।
स्वच्छता के साथ रोजगार सृजन का प्रभावी मॉडल
जिला समन्वयक राजेश जैन ने बताया कि स्वच्छता प्रहरियों द्वारा अब तक लगभग 200 यूनिट शौचालयों की सफाई की जा चुकी है, जिससे करीब 60 हजार रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित हुई है। यह पहल न केवल ग्रामीण स्वच्छता को मजबूत कर रही है, बल्कि युवाओं के लिए आय का स्थायी माध्यम भी बन रही है।
सफाई के साथ मरम्मत भी
JOSH मॉडल के अंतर्गत स्वच्छता प्रहरी केवल शौचालयों की सफाई ही नहीं कर रहे, बल्कि क्षतिग्रस्त एवं अनुपयोगी शौचालयों की मरम्मत भी कर रहे हैं। इसमें जाम यूरिनल पैन, पाइप लाइन, चैंबर, टाइल्स फिटिंग जैसी तकनीकी समस्याओं का समाधान किया जा रहा है, जिससे शौचालय उपयोगी और टिकाऊ बन रहे हैं।
मात्र 200 रुपये सेवा शुल्क, स्वच्छता का सशक्त अभियान
स्वच्छता प्रहरी हितग्राहियों से प्रति यूनिट केवल 200 रुपये सेवा शुल्क लेकर बेहतर सफाई एवं रखरखाव सुनिश्चित कर रहे हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में कम लागत पर गुणवत्तापूर्ण स्वच्छता सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं।
कई विभागों से समन्वय, संस्थागत स्वच्छता को बढ़ावा
इस अभियान के प्रभावी संचालन के लिए शिक्षा विभाग, पंचायत विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा आदिवासी विकास विभाग के साथ समन्वय स्थापित किया गया है, ताकि स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों एवं अन्य संस्थागत शौचालयों में नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित हो सके।
एमसीबी बना नवाचार का मॉडल
जिले की यह पहल दर्शाती है कि स्थानीय नवाचार, यदि प्रभावी नेतृत्व और जनसहभागिता के साथ लागू हो, तो वह राज्य स्तर पर नीति का आधार बन सकता है। JOSH अब केवल एक स्वच्छता अभियान नहीं, बल्कि स्वच्छता, सम्मान और स्वरोजगार का ऐसा मॉडल बन चुका है, जिसने एमसीबी जिले को पूरे प्रदेश में नई पहचान दिलाई है।



