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छत्तीसगढ़ में ED की ताबड़तोड़ रेड, ‘अमर इंफ्रा’ समेत कई ठिकानों पर छापा

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रायपुर : ईडी ने दुर्ग में ‘अमर इंफ्रा’ के संचालक और भाजपा नेता चतुर्भुज राठी के निवास व दफ्तर पर दबिश दी है, आधा दर्जन फर्मों के वित्तीय दस्तावेजों और निवेश के रिकॉर्ड खंगाल रही है। भिलाई में गोविंद मंडल के घर और फैक्ट्री, बिलासपुर में सराफा कारेबारी विवेक अग्रवाल के सदर बाजार स्थित श्रीराम ज्वेलर्स और ठिकानों पर छापा मारा है।

यह कार्रवाई शराब घोटाले के फरार आरोपी विकास अग्रवाल के सिंडिकेट से जुड़े तार खंगालने के लिए की जा रही है, जो अनवर ढेबर का करीबी और विवेक अग्रवाल का भाई बताया जा रहा है।

राज्य में निर्माणाधीन भारतमाला प्रोजेक्ट में हुए मुआवजा घोटाले में भाजपा-कांग्रेस के विधायक और दिग्गज नेताओं के नाम भी सामने आए हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) इनकी भूमिका की जांच कर रही है।

शुरुआती जांच में सामने आया है, जिन क्षेत्रों से यह प्रोजेक्ट गुजर रहा है, वहां दिग्गज नेताओं ने अपने रिश्तेदारों के नाम पर जमीन खरीदी। बाद में उन्हीं जमीनों का मुआवजा भी लिया।

पटवारी-आरआई की भूमिका

पटवारी और आरआई ने मुआवजे के प्रकरण बनाकर कलेक्टर को भेजे। जिन पर हस्ताक्षर के बाद मुआवजा जारी किया गया। इन नेताओं से जुड़े लोगों के ठिकानों पर ईडी ने 27 अप्रैल को छापेमारी की थी। वहां से कुछ दस्तावेज मिले हैं, जिनसे नेताओं की कड़ियां जुड़ने के संकेत मिले हैं। इसमें एक दिग्गज भाजपा नेता से संबंधित दस्तावेज भी शामिल बताया जा रहा है।

12 जिलों के तत्कालीन कलेक्टरों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। इनमें से 6 कलेक्टरों की संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है, जिन पर मोटा कमीशन लेने का आरोप है। इनमें रायपुर, कोरबा, धमतरी, बिलासपुर और दुर्ग के तत्कालीन कलेक्टरों के नाम सामने आए हैं। पकड़े गए आरोपियों ने भी पूछताछ में इनका जिक्र किया है।

ईओडब्ल्यू का दावा- राजस्व अधिकारियों ने किया घोटाला

आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा EOW ने सरकार के निर्देश पर भारतमाला प्रोजेक्ट के मुआवजा घोटाले में एफआईआर दर्ज की है। इस मामले की जांच के बाद तत्कालीन एसडीएम निर्भय साहू समेत 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

इसमें पटवारी, राजस्व निरीक्षक, प्रॉपर्टी डीलर और किसान भी शामिल हैं। मामले की जांच पूरी हो चुकी है और जल्द ही ईओडब्ल्यू इस प्रकरण में अंतिम चालान पेश करने की तैयारी में है।

ईओडब्ल्यू के इसी मामले के आधार पर ईडी ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की है, लेकिन ईडी बड़े अधिकारियों (आईएएस) की भूमिका की अलग से जांच कर रही है। रायपुर के बाद सबसे अधिक मुआवजा गड़बड़ी कोरबा जिले में सामने आई है।

यहां मनमाने तरीके से मुआवजा बांटा गया। ईडी कोरबा के तत्कालीन दो महिला और एक पुरुष कलेक्टर की भूमिका की जांच कर रही है। आरोप है कि इन्हें मोटा कमीशन पहुंचाया गया। ईडी पूर्व मंत्रियों, विधायकों के साथ दिग्गज भाजपा, कांग्रेस और जोगी कांग्रेस से जुड़े नेताओं की भूमिका की जांच कर रहा है। उनके करीबी और रिश्तेदारों के नाम सामने आए हैं, जिनके जरिए जांच एजेंसी नेताओं तक कड़ियां जोड़ रही है।

इस मामले में करीब दो दर्जन प्रॉपर्टी डीलर और बिचौलियों के नाम भी सामने आए हैं। कुछ अधिकारियों के रिश्तेदारों की संलिप्तता की भी जांच की जा रही है।

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