हिंदू धर्म में दान-पुण्य को बहुत ऊंचा स्थान दिया गया है। माना जाता है कि निस्वार्थ भाव से किया गया दान न केवल घर में सुख-शांति लाता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों का भी कल्याण करता है। अक्सर खुशी के मौकों जैसे शादी, जन्मदिन या गृह प्रवेश पर हम एक-दूसरे को तोहफे देते हैं।
इन तोहफों में सबसे कॉमन है भगवान गणेश या अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां। लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि वास्तु के नजरिए से यह सही है या नहीं? आइए जानते हैं वास्तु शास्त्र इस बारे में क्या कहता है।
क्या भगवान की मूर्ति गिफ्ट करना सही है?
वास्तु शास्त्र के अनुसार, अगर आपके पड़ोस या क्षेत्र में कोई नया मंदिर बन रहा है, तो वहां देवी-देवताओं की मूर्तियां दान करना बेहद शुभ और फलदायी होता है। इससे भगवान की विशेष कृपा मिलती है। लेकिन, किसी व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से भगवान की मूर्ति या तस्वीर उपहार में देना वास्तु में अच्छा नहीं माना जाता।
इसके पीछे का तर्क यह है कि जब हम किसी को भगवान की मूर्ति देते हैं, तो प्रतीकात्मक रूप से हम अपने घर के सौभाग्य और ईष्टदेव को अपने से दूर भेज रहे होते हैं। इसी तरह, चांदी के वे सिक्के जिन पर देवी-देवताओं के चित्र बने हों, उन्हें भी उपहार में देने से बचना चाहिए।
नुकीली चीजें: कभी भी किसी को कैंची, चाकू, सुई-धागा या लोहे का सामान गिफ्ट न करें। वास्तु कहता है कि इससे देने वाले और लेने वाले के बीच मतभेद और तनाव बढ़ता है।
चमड़े का सामान: वास्तु के अनुसार, जूते, चप्पल, बेल्ट या पर्स जैसी चमड़े की चीजें गिफ्ट करना अशुभ होता है। यह नकारात्मक ऊर्जा को न्योता दे सकता है।
परफ्यूम और तेल: खुशबूदार चीजें जैसे परफ्यूम या फिर तेल को भी उपहार में देना शुभ नहीं माना जाता।
मनी प्लांट: अक्सर लोग हरियाली के नाम पर मनी प्लांट गिफ्ट कर देते हैं। लेकिन, वास्तु कहता है कि मनी प्लांट (Money plant) देने का मतलब है अपनी आर्थिक समृद्धि किसी और को सौंप देना। इससे आपकी बरकत कम हो सकती है।
घड़ी: घड़ी को समय का प्रतीक माना जाता है। वास्तु के अनुसार, घड़ी गिफ्ट करने का मतलब है अपना ‘समय’ दूसरे को देना। अगर आपका अच्छा समय चल रहा है, तो वह दूसरे के पास जा सकता है, जिससे आपकी परेशानियां बढ़ सकती हैं।



