कभी-कभी हम करीबियों या दोस्तों को अपनी सारी बातें बता देते हैं, जो आगे चलकर हमारे लिए नुकसान का कारण बनती हैं। आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति में ऐसी कई बातों का जिक्र किया है, जिनका ढोल नहीं पीटना चाहिए यानी उन्हें गुप्त रखना चाहिए, वरना व्यक्ति अपना ही नुकसान कर बैठता है। चलिए जानते हैं कि इस बारे में चाणक्य की नीति क्या कहती है।
नीचं वाक्यं चापमानं मतिमान्न प्रकाशयेत्॥
चाणक्य नीति का यह श्लोक जीवन में गोपनीयता और समझदारी के महत्व को बताता है। इस श्लोक में कहा गया है कि बुद्धिमान (मतिमान) व्यक्ति को अपनी इन पांच बातों को दूसरों के सामने प्रकट नहीं करना चाहिए, फिर चाहे वह व्यक्ति आपके कितना ही करीब क्यों न हो –
- धन का नाश – अगर आप किसी को पैसे के हुए नुकसान के बारे में बताते हैं, तो इससे लोग आपकी आर्थिक स्थिति का मजाक उड़ा सकते हैं या फिर आपका फायदा भी उठा सकते हैं।
- मन का दुख – आचार्य चाणक्य कहते हैं कि अगर आपके मन में कोई दुख है, तो इसे किसी को न बताएं। क्योंकि कुछ लोग सामने तो आपके दुख पर सहानुभूति जताते हैं, लेकिन पीठ पीछे हंसते हैं।
- घर की बातें – चाणक्य नीति के इस श्लोक में कहा गया है कि घर की कमजोरियां बाहर बताने से परिवार की प्रतिष्ठा गिरती है। या फिर आपके घर के हालातों का फायदा भी उठाया जा सकता है। इसलिए चाहे कोई कितना भी खास क्यों न हो, उसे अपने घर की सारी बातें न बताएं।
- नीच वाक्य और अपमान – अगर कभी किसी व्यक्ति ने आपको अपशब्द कहे हैं, या फिर आपका कभी अपमान हुआ है, तो इस तरह की बातों को भी दूसरों को बताने से बचना चाहिए। क्योंकि इससे अपमानित व्यक्ति की ही बदनामी होती है।
- अपनी कमजोरियां – कभी किसी को अपनी कमजोरियों का जिक्र न करें। ऐसे में आप जगहंसाई का कारण बनते हैं या फिर कोई दूसरा व्यक्ति आपकी उन कमजोरियों का फायदा भी उठा सकता है।
न पीटें इस बात का ढिंढोरा
इस श्लोक में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि व्यक्ति को मन में सोचे गए कार्य को कभी भी किसी के सामने प्रकट नहीं करना चाहिए। ऐसे में व्यक्ति को अपनी योजना को हमेशा गुप्त रखना चाहिए, ताकि उस कार्य की सफलता सुनिश्चित हो सके।



