अमन पथ न्यूज़ बालोद से उत्तम साहू : जिला में इस वर्ष दसवीं एवम बारहवीं बोर्ड परीक्षा में न्यून और निराशाजनक परीक्षा परिणाम के लिए केवल संस्था के प्राचार्य एवम शिक्षक ही जिम्मेदार नहीं है बल्कि शिक्षा में आ रही निरंतर शैक्षिक गुणवत्ता के अवमूल्यन के लिए सरकार,अभिभावकों, एवम शैक्षिक संस्थाओं को व्यापक विमर्श करने की आवश्यकता है। उक्ताशय के विचार शिक्षा प्रकोष्ठ भाजपा के प्रदेश सह संयोजक जगदीश देशमुख ने व्यक्त किए।श्री देशमुख ने कहा कि बालोद जिला के शैक्षिक गुणवत्ता में तेजी से गिरावट और बोर्ड परीक्षा परिणाम सिफर होने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी की लचर व्यवस्था ही ज्यादा जिम्मेदार है।
इसके पूर्व के जिला शिक्षा अधिकारियों के द्वारा प्राचार्यों की सम्यक बैठक और ब्लू प्रिंट के साथ परीक्षा पर चर्चा होती थी इस बार शिक्षा विभाग निष्क्रियता और अकर्मण्यता का भेंट चढ़ गया। तत्कालीन कलेक्टर राजेश राणा एवम जिला शिक्षा अधिकारी आशुतोष चावरे के समय शिक्षा विभाग में अध्ययन,अध्यापन में कसावट देखी जाती थी,साथ ही शिक्षा विदों के साथ समन्वय देखा जाता था, इस बार जिले में माहौल नहीं देखा गया।श्री देशमुख ने कहा कि सन2024 में 11बच्चे तथा सन 2025में साथ बच्चे कक्षा दसवीं एवम बारहवीं में प्रवीण्य में आए। इसके पूर्व जिला बालोद प्रवीण्य परीक्षा परिणाम में अग्रणी रहा है। प्राथमिक एवम माध्यमिक शिक्षा की गुणवत्ता सुधार पर एक बड़ा प्रश्न चिन्ह खड़ा होता ये भी एक जिम्मेदार पहलू है। शिक्षा विभाग के अधिकांश शिक्षक लंबे समय तक अनेकानेक गैर शिक्षकीय कार्यों में संलग्न रहते है। शैक्षिक गुणवत्ता के व्यापक सुधार के लिए व्यापक चिंतन और विमर्श करने की आवश्यकता है। बहरहाल जिला कलेक्टर द्वारा आक्रोश में आकर प्राचार्यों का निलंबन और वेतनवृद्धि रोकने जैसे कार्यवाही उचित नहीं है।



