किरंदुल : आज के दौर में ज़्यादातर कार्यक्रम कैमरों, भाषणों और सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित होकर रह जाते हैं। लेकिन विश्व नर्स दिवस के अवसर पर किरंदुल के Zayka Restaurant में एक ऐसा आयोजन होने जा रहा है, जिसने पहले से ही लोगों का ध्यान खींचना शुरू कर दिया है।
12 मई की रात, एक घंटे के लिए पूरा Zayka Restaurant सिर्फ नर्सों के लिए आरक्षित रहेगा।
न कोई मंच होगा,
न मुख्य अतिथि,
न फोटो सेशन।
बस शांत माहौल, गरम खाना और उन लोगों के लिए एक छोटी-सी राहत होगी—
जो रोज़ अपनी नींद छोड़कर दूसरों की जिंदगी संभालते हैं।
आयोजन का सबसे अलग पहलू यह बताया जा रहा है कि यहाँ “बिल” पैसों में नहीं, बल्कि “थकान उतारने” की भावना में चुकाया जाएगा।
रेस्टोरेंट की ओर से साझा किए गए संदेशों और विजुअल्स ने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींचा है।
इस पहल के सूत्रधार तीसरी आंख के लेखक हारून रशीद ने कहा कि समाज अक्सर डॉक्टर को याद रखता है, लेकिन मरीज सबसे पहले नर्स की आवाज़ सुनता है।
उनके अनुसार, ऐसे छोटे-छोटे प्रयास उन लोगों को यह एहसास दिलाने के लिए जरूरी हैं कि उनकी सेवा सिर्फ ड्यूटी नहीं, बल्कि समाज के लिए उम्मीद है।
डिजिटल युग के इस शोर में, जहाँ हर चीज़ प्रचार और “लाइक” के लिए की जाती है, ऐसे आयोजन यह याद दिलाते हैं कि संवेदनाएं अभी भी ज़िंदा हैं।
मीडिया की भूमिका सिर्फ खबर दिखाना नहीं, बल्कि समाज को ऐसे सकारात्मक प्रयासों से जोड़ना भी है—ताकि सम्मान सिर्फ शब्द न रहे, बल्कि संस्कृति बन सके।
👉 जब समाज अपने खामोश सेवकों को याद रखने लगे…
👉 तभी इंसानियत सच में ज़िंदा कहलाएगी।



