चिरमिरी : जगतगुरु रामभद्राचार्य जी ने कहा कि महंत को मेरी खुली चुनौती है, मेरे जगतगुरू का पूर्ण परीक्षण कर ले,उन्होंने जगतगुरू होने का बताया मूल कारण, कहा मै सभी कसौटी पर खरा हुं तीन ग्रंथों को भाष्य में लिखना अनिवार्य है जगतगुरू के लिए, सभी अखाड़े इसका समर्थन करते है।
इनको मिर्ची लग रही है, जो राम जी से प्रेम करेगा उसको मेरा आशीर्वाद मिलेगा वो दिन आप भूल गए जब निहत्थे रामभक्तों पर लाठियां ही नहीं बल्कि गोलियां तक चलवाई गई थी,
हम रामजन्मभूमि के लिए महीनों जेल में रहे, आपने क्या किया उत्तर दीजिए।
देश को गर्त में ले गए महोदय, देश का विभाजन करवाया आपने, देश को टुकड़ों – टुकड़ों में बटवा दिया आपने।
जोगी थोड़े अच्छे थे लेकिन उसके बाद की मै क्या बताऊं, इतने असभ्य, कॉमनसेंस तक नहीं है कि संतों के बारे में बोला कैसे जाता है?
प्रतिपक्ष नेता मै खुली चुनौती दे रहा हुं, मै ऐसे जगतगुरू नहीं हुं, 22 भाषाओं में धारा प्रवाह बोल सकता हुं
चिरमिरी लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम से श्री रामकथा के नौवें दिन व्यासपीठ से दी नसीहत और चुनौती।
जय श्री राम के नारों से भक्तों ने जगतगुरू के वाणी को दिया विस्तार।



