‘सुशासन तिहार’ फ्लॉप होने के बाद फिर सरकारी धन की बर्बादी
महासमुंद : जीव जंतु कल्याण बोर्ड छग शासन के उपाध्यक्ष व छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के संयुक्त महामंत्री आलोक चंद्राकर ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा कल 19 जून को घोषित ‘सुघ्घर छत्तीसगढ़’ अभियान को भाजपा सरकार की हताशा का सबूत बताया है। श्री चंद्राकर ने कहा कि जब ‘सुशासन तिहार’ के नाम पर लगाए गए शिविर पूरी तरह फ्लॉप हो गए और जनता तक योजनाओं का लाभ नहीं पहुंचा, तो अब सरकार उसी असफल फॉर्मूले को नए नाम से दोहराकर सरकारी धन की बर्बादी की तैयारी कर रही है।श्री चंद्राकर ने सवाल उठाए हैं कि सरकार पहले ये बताए कि पिछले महीने 1 मई से 10 जून तक पूरे प्रदेश में मनाई गई ‘सुशासन तिहार’ के नाम पर जो शिविर लगे, उनसे कितने पात्र परिवारों को लाभ मिला? कितनी शिकायतों का निराकरण हुआ? अगर वो अभियान सफल था तो कल 19 जून को नए सिरे से 23 जिलों में 31 योजनाओं के संयुक्त शिविर लगाने की घोषणा क्यों करनी पड़ी? सुशासन तिहार में भी योजनाओं की पहुंच का दावा किया गया था। अब ‘सुघ्घर छत्तीसगढ़’ में वही बात दोहराई जा रही है।
क्या यह मान लिया जाए कि पहला अभियान फेल हो गया? जनता की गाढ़ी कमाई को बार-बार एक ही तरह के प्रचार शिविरों में उड़ाना कहां का सुशासन है? सरकार की नियत में खोट का आरोप लगाते हुए उन्होने कहा कि ‘नियद नेल्लानार’ हमारी सरकार की योजना थी जिसे इन्होंने बंद किया। पौने 3 साल में हर क्षेत्र में विफल सरकार अब उसी को रंग-रोगन करके 19 जून को जनता के सामने परोसने की तैयारी करने की घोषणा की है।
न नाम बदला, न काम बदला – बस जनता को भ्रमित करने की नीयत नई है। आलोक चंद्राकर ने कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था, महंगाई और बेरोजगारी से जनता त्रस्त है। शिविरों के नाम पर करोड़ों रुपये फूंकने से बेहतर है कि सरकार राशन, पेंशन, स्वास्थ्य और रोजगार पर ध्यान दे। उन्होंने मांग की है कि ‘सुशासन तिहार’ पर खर्च हुए बजट और उसके परिणामों का श्वेत पत्र जारी किया जाए, ताकि जनता को पता चले कि 19 जून को घोषित ‘सुघ्घर छत्तीसगढ़’ भी कहीं उसी का दूसरा भाग तो नहीं।



