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आजीविका डबरी से बदलेगी पर्वतिया के परिवार की तस्वीर,डबरी से सिंचाई, मछली पालन से कमाई

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कोरिया:एक कृषक परिवार को यदि खेतों में सिंचाई का स्थायी साधन मिल जाए तो उसकी मेहनत को तरक्की की राह पर आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। इसी सोच के साथ कोरिया जिले में बड़ी संख्या में आजीविका डबरियों का निर्माण किया जा रहा है। ये डबरियां केवल जल संरक्षण का माध्यम नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण परिवारों के लिए आय और समृद्धि के नए अवसर भी लेकर आ रही हैं।

कोरिया जिले में वर्तमान में एक सैकड़े से अधिक आजीविका डबरियों का निर्माण पूर्ण कराया जा चुका है। इसी क्रम में सोनहत जनपद पंचायत के ग्राम नटवाही निवासी नवलसाय और उनकी पत्नी श्रीमती पर्वतिया के खेत में भी आजीविका डबरी का निर्माण हुआ है। अब यह परिवार आगामी बारिश के साथ अपनी नई संभावनाओं और खुशियों का इंतजार कर रहा है।

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की पहल

आजीविका डबरी की अवधारणा बिहान से जुड़ी महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई है। ऐसे पंजीकृत श्रमिक परिवार, जिनकी महिलाएं बिहान समूह से जुड़ी हैं, उनके नाम पर डबरी का निर्माण कराया जा रहा है। इससे महिलाओं में स्वामित्व की भावना विकसित हो रही है और वे परिवार की आर्थिक उन्नति में सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं। सभी आजीविका डबरियों को मत्स्य पालन विभाग की योजनाओं से भी जोड़ा जा रहा है, ताकि हितग्राही परिवार सिंचाई के साथ-साथ मछली पालन के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित कर सकें।

दो एकड़ भूमि की सिंचाई में होगी मदद

मनरेगा के तहत निर्मित प्रत्येक आजीविका डबरी का मानक आकार 25 मीटर लंबाई, 25 मीटर चौड़ाई और 3 मीटर गहराई निर्धारित किया गया है। जलभराव के बाद इनमें लगभग 2500 घनमीटर पानी का संचयन किया जा सकता है। इससे किसान अपने लगभग दो एकड़ खेत में दो फसलों की सिंचाई आसानी से कर सकेंगे।

मछली पालन से बढ़ेगी आय

पर्वतिया और नवलसाय बताते हैं कि डबरी का निर्माण उपयुक्त स्थान पर होने के कारण निर्माण कार्य के दौरान ही इसमें पानी भरना शुरू हो गया था। उन्हें उम्मीद है कि पहली ही बारिश में डबरी पूरी तरह भर जाएगी। इससे खेतों की सिंचाई की समस्या दूर होगी और मछली पालन की शुरुआत भी हो सकेगी।

दंपत्ति का अनुमान है कि डबरी में मत्स्य पालन से उन्हें प्रतिवर्ष एक लाख रुपये से अधिक की अतिरिक्त आय प्राप्त हो सकेगी। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और आजीविका के नए अवसर भी सृजित होंगे। इस प्रकार आजीविका डबरी ग्रामीण परिवारों के लिए जल संरक्षण, कृषि उत्पादन वृद्धि और अतिरिक्त आय का प्रभावी माध्यम बनकर उभर रही है।

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