हर साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाता है. ये साल की सबसे बड़ी और अधिक पुण्यदायी एकादशी मानी जाती है. निर्जला एकादशी का व्रत सभी एकादशी व्रतों में सबसे कठिन होता है. इस साल 25 जून यानी कल निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाने वाला है. इस दिन भगवान विष्णु के भक्त निर्जला उपवास रखते हैं. यही कारण है इसको सबसे कठिन व्रत कहते हैं.धार्मिक मान्यता है कि निर्जला एकादशी का व्रत रखने और विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करने पर सभी एकादशी व्रतों का पुण्य प्राप्त हो जाता है. साथ ही जन्म मरण के चक्र से आत्मा को मुक्ति मिल जाती है और वैकुंठ धाम में स्थान प्राप्त होता है. जितना जरूरी नियम के अनुसार इस व्रत को रखना होता है, उतना ही जरूरी नियमानुसार इस व्रत का पारण भी होता है. माना जाता है कि निर्जला एकादशी का विधि पूर्वक पारण करने पर ही व्रत पूर्ण होता है. निर्जला एकादशी के व्रत का पारण 26 जून को किया जाएगा.
निर्जला एकादशी व्रत पारण का शुभ मुहूर्त:-शास्त्रों में वर्णित है कि निर्जला एकादशी का व्रत हमेशा द्वादशी तिथि के दिन ही किया जाता है. इस साल निर्जला एकादशी के व्रत के पारण का शुभ मुहूर्त सुबह 05 बजकर 25 मिनट पर शुरू होगा. ये शुभ मुहूर्त 08 बजकर 13 मिनट तक रहेगा. भक्त इस समय निर्जला एकादशी के व्रत का पारण कर सकते हैं. 26 जून को द्वादशी तिथि रात को 10 बजकर 22 मिनट पर समाप्त होगी.
निर्जला एकादशी व्रत के पारण की विधि:- निर्जला एकादशी के व्रत का पारण करने के लिए सबसे पहले द्वादशी तिथि पर स्नान आदि करें. फिर साफ वस्त्र धारण करें. इसके बाद पूजा घर में भगवान श्री हरि विष्णु का जलाभिषेक करें. भगवान का पंचामृत समेत गंगाजल के अभिषेक करें. अब भगवान को पीला चंदन और पीले फूल अर्पित करें. भगवान के सामने घी का दीपक जलाएं. ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें. भगवान श्री हरि विष्णु और लक्ष्मी जी की आरती करें प्रभु को तुलसी सहित भोग लगाएं. अंत में व्रत संकल्प पूर्ण करें व क्षमा प्रार्थना करें.
व्रत का पारण करते समय रखें इन बातों का ध्यान:- निर्जला एकादशी के व्रत का पारण द्वादशी तिथि के समाप्त होने से पहले और सूर्योंदय के बाद ही करें. इस व्रत के पारण में हरि वासर का भी ध्यान अवश्य रखें. निर्जला एकादशी के व्रत का पारण हरि वासर में न करें. इसके समाप्त होने का इंतजार करें.



