कोरिया : कोरिया जिले में मत्स्य पालन विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाएं मछुआरों और मत्स्य पालकों की आय बढ़ाने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में पौष्टिक आहार के रूप में मछली की उपलब्धता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक राज्य पोषित मत्स्य पालन प्रसार योजना के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में अनेक योजनाओं का सफल क्रियान्वयन किया गया, जिससे जिले के सैकड़ों हितग्राही लाभान्वित हुए हैं।
50 प्रतिशत अनुदान पर अंगुलिका संचयन
मत्स्य बीज उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिले को वर्ष 2025-26 में 950 लाख स्पान उत्पादन का लक्ष्य प्राप्त हुआ था, जिसके विरुद्ध 850.09 लाख स्पान का उत्पादन किया गया। इसके आधार पर 70 लाख स्टैंडर्ड फ्राई का उत्पादन किया गया। शासकीय मत्स्य बीज प्रक्षेत्रों से 250 हितग्राहियों को 50 प्रतिशत अनुदान पर मत्स्य अंगुलिकाओं का वितरण कर तालाबों में संचयन कराया गया।
स्पान संवर्धन योजना से मौसमी तालाबों को मिला लाभ
स्पान संवर्धन योजना के तहत मौसमी तालाबों के हितग्राहियों को 30 हजार रुपये तक की सहायता प्रदान की जाती है। योजना में मत्स्य बीज, मत्स्य आहार एवं जाल उपलब्ध कराए जाते हैं। वर्ष 2025-26 में जिले के विभिन्न विकासखंडों के 14 हितग्राहियों को इस योजना का लाभ दिया गया।
फुटकर मछली विक्रेताओं को मिला स्वरोजगार
ग्रामीण क्षेत्रों में ताजी मछली की उपलब्धता बढ़ाने और स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से फुटकर मछली विक्रेताओं को 6 हजार रुपये मूल्य का आईस बॉक्स शत-प्रतिशत अनुदान पर प्रदान किया जाता है। वर्ष 2025-26 में जिले के 30 फुटकर मत्स्य विक्रेताओं को आईस बॉक्स वितरित किए गए।
मछुआरों को मिला नाव-जाल उपकरणों का लाभ
तालाबों, जलाशयों और नदियों में मत्स्याखेट को सुविधाजनक बनाने के लिए नाव-जाल वितरण योजना संचालित की जा रही है। इसके तहत वर्ष 2025-26 में जिले के 40 मत्स्य पालकों को शत-प्रतिशत अनुदान पर जाल वितरित किए गए, जिससे उनकी आजीविका को मजबूती मिली।
प्रशिक्षण और अध्ययन भ्रमण से बढ़ी तकनीकी दक्षता
मत्स्य पालन को वैज्ञानिक और व्यावसायिक स्वरूप देने के लिए विभाग द्वारा नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। वर्ष 2025-26 में जिले के 90 हितग्राहियों को 10 दिवसीय प्रशिक्षण, 300 हितग्राहियों को 8 दिवसीय प्रशिक्षण तथा 21 मत्स्य पालकों को राज्य के बाहर अध्ययन भ्रमण कराया गया। इससे हितग्राहियों को आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों की जानकारी प्राप्त हुई।
जलक्षेत्र आवंटन में लक्ष्य से अधिक उपलब्धि
मत्स्य पालन को प्रोत्साहित करने के लिए ग्रामीण तालाबों का पट्टा आवंटन भी किया गया। वर्ष 2025-26 में 10 हेक्टेयर जलक्षेत्र आवंटन का लक्ष्य प्राप्त हुआ था, जबकि 10.89 हेक्टेयर क्षेत्रफल के तालाबों को मत्स्य पालन एवं मत्स्याखेट के लिए 8 मत्स्य पालन समूहों को 10 वर्षीय पट्टे पर आवंटित किया गया।
आय वृद्धि और पोषण सुरक्षा की दिशा में प्रभावी पहल
मत्स्य पालन विभाग की इन योजनाओं से जिले में मत्स्य उत्पादन, स्वरोजगार और आय के अवसरों में वृद्धि हुई है। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में पौष्टिक खाद्य पदार्थ के रूप में मछली की उपलब्धता बढ़ने से पोषण सुरक्षा को भी बल मिला है। विभाग की यह पहल आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।



